क्या प्लेन के टॉयर के नीचे छिपकर कोई कर सकता है सफर, जानिए इसका जवाब

दुनियाभर में कुछ ऐसे केस आए हैं, जब कुछ लोगों ने टायर में छिपकर सफर करने की कोशिश की है. इसमें एक मामला भारत का भी है.
फ्लाइट के अंदर सफर करना और फ्लाइट के किसी बाहरी हिस्से में छिपकर सफर करने में जमीन आसमान का अंतर है. अब सवाल ये कि इतनी ऊंचाई पर तेज हवा और कम ऑक्सीजन में क्या कोई व्यक्ति जिंदा रह पाएगा.
1996 में पंजाब के दो भाई प्रदीप और विजय सैनी को एक मामले में पुलिस लगभग हर रोज परेशान करती थी. वो खुद को निर्दोष बताते, लेकिन पुलिस उनसे लगातार पूछताछ करती रहती थी.
वहां से भागकर लंदन जाने के लिए काफी मशक्कत के बाद वो दिल्ली एयरपोर्ट पर ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट के पास पहुंचे थे. जहां वो लैंडिंग गियर में छिपकर लंदन का सफर किए थे, लेकिन लंदन पहुंचने पर बस अधमरी हालत में प्रदीप मिला था, विजय की मौत हो चुकी थी.
बता दें कि फ्लाइट के टॉयर या किसी अन्य खुले हिस्से में बैठकर फ्लाइट सफर करना मुश्किल और जोखिम भरा है. क्योंकि हजारों फीट की ऊंचाई पर व्यक्ति को ऑक्सीजन लेने की दिक्कत होगी, इस दौरान व्यक्ति वहां से गिरने के कारण मौत हो सकती है.
इतना ही नहीं फ्लाइट के टॉयर या लैंडिंग गियर में छिपने के कारण इंजन की आवाज से कान फट जाएगा. इसके अलावा ठंड समेत तेज हवा और सांस लेने में दिक्कत के कारण कई बार व्यक्ति बेहोश होकर जमीन पर गिर जाता है.