क्या चांद की मिट्टी पर खड़ी हो सकती है इमारत, पृथ्वी से कैसे अलग?

Lunar Soil: जैसे-जैसे स्पेस एजेंसियां चांद पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी बनाए रखने की होड़ में लगी हैं, सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है पृथ्वी से भारी मात्रा में निर्माण सामग्री ले जाए बिना वहां रहने की जगह बनाना. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या चांद की सतह पर कोई इमारत खड़ी हो सकती है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी जैसी स्पेस एजेंसियां ऐसी तकनीकें विकसित कर रही हैं जिनसे पृथ्वी से निर्माण सामग्री ले जाने के बजाय चांद पर ही मौजूद रेगोलिथ का इस्तेमाल करके वहां बेस बनाए जा सकें.
शोधकर्ताओं ने चीन के चांग-ई 5 मिशन से लाए गए चांद के नमूनों का इस्तेमाल करके कुछ ईंटें बनाई हैं. इससे यह साबित होता है कि चांद की रेगोलिथ को मजबूत निर्माण सामग्री में बदला जा सकता है.
पृथ्वी की मिट्टी के उलट चांद की रेगोलिथ पूरी तरह से सूखी होती है और इसमें पानी, हवा, सूक्ष्मजीव या फिर जैविक पदार्थ नहीं होते. इसमें मुख्य रूप से उल्कापिंडों के टकराने से बने चट्टानों के बारीक टुकड़े होते हैं.
क्योंकि चांद पर हवा या फिर पानी नहीं है जो समय के साथ कणों को चिकना कर सके, इस वजह से चांद की मिट्टी में कांच जैसे नुकीले कण होते हैं जो स्पेससूट, मशीनरी और निर्माण उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
सोलर रेडिएशन की वजह से चांद की धूल पर मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज होता है. इससे यह उपकरण, सोलर पैनल और अंतरिक्ष यात्रियों के सूट से चिपक जाती है. इससे रखरखाव मुश्किल हो जाता है.
क्योंकि चांद पर पानी की कमी है इस वजह से शोधकर्ता लेजर सिंटरिंग और सोलर हीटिंग जैसी तकनीकें विकसित कर रहे हैं. ऐसा इसलिए ताकि बिना पानी के चांद की मिट्टी को ठोस, कंक्रीट जैसी ईंटों में बदला जा सके.
उम्मीद है कि अंतरिक्ष यात्रियों के पहुंचने से पहले ही ऑटोनॉमस रोबोट वहां पहुंच जाएंगे. साथ ही 3D प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके चांद पर ही रेगोलिथ से दीवारें और शेल्टर बनाएंगे.
रेगोलिथ अंतरिक्ष यात्रियों को हानिकारक अंतरिक्ष विकिरण और काफी ज्यादा तापमान से बचा सकती है. साथ ही चांद पर कम गुरुत्वाकर्षण की वजह से छोटी नींव के साथ भी बड़ी संरचनाएं बनाई जा सकती हैं.