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इस जानवर के पैर में होते हैं सेंसर्स, टांगों से टेस्ट करती है अपना खाना

निधि पाल   |  05 Nov 2025 12:07 PM (IST)
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तितली, जिसे हम अक्सर फूलों के आसपास मंडराते हुए देखते हैं, दिखने में जितनी नाजुक होती है, उतनी ही चतुर भी. आमतौर पर हम सोचते हैं कि स्वाद का एहसास सिर्फ जीभ से होता है, लेकिन तितलियों के मामले में यह बिल्कुल उलटा है.

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उनके पैरों में ऐसे विशेष सेंसर्स या रिसेप्टर्स होते हैं, जो किसी भी सतह या फूल को छूते ही उसका स्वाद महसूस कर लेते हैं.

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दरअसल, जब तितली किसी फूल या फल पर उतरती है, तो उसके पैरों में मौजूद ये सेंसर उस सतह की रासायनिक संरचना को पहचान लेते हैं. अगर फूल में मौजूद रस मीठा और पौष्टिक होता है, तो तितली समझ जाती है कि यह खाने योग्य है.

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इसके बाद ही वह अपनी लंबी नली जैसी जीभ, जिसे प्रोबोसिस कहा जाता है, निकालती है और रस पीना शुरू करती है. तितलियों का पसंदीदा भोजन फूलों का अमृत यानी नेक्टर होता है.

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हालांकि, वे केवल फूलों तक सीमित नहीं रहतीं. कभी-कभी सड़ते हुए फलों, पौधों की नमी या यहां तक कि काई से भी पोषण ले लेती हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि तितलियों का यह अनोखा स्वाद पहचानने वाला सिस्टम उन्हें भोजन की गुणवत्ता और उसके स्रोत की पहचान में मदद करता है.

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लेकिन तितलियों की कहानी सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है. वे पर्यावरण के संतुलन में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. जब वे फूलों से रस पीती हैं, तो अनजाने में एक फूल से दूसरे फूल तक परागकण (pollen) पहुंचा देती हैं.

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यह प्रक्रिया परागण कहलाती है, जिसके बिना फलों और बीजों का निर्माण संभव नहीं होता है. इस तरह तितलियां न सिर्फ अपनी भूख मिटाती हैं, बल्कि धरती के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में भी अहम योगदान देती हैं.

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