बिहार को 'बिहार' ही क्यों कहा गया, यूपी या पंजाब क्यों नहीं? कैसे पड़ा इसका नाम
चुनाव के इस मौसम में जब बिहार में चारों ओर चुनावी बयार बड़ी जोर शोर से बह रही है. लोग अपने भविष्य का फैसला करने जा रहे हैं तो यह जानना जरूरी है कि इस राज्य के नाम के पीछे की कहानी क्या है.
बिहार का नाम सुनते ही हमारे मन में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, भगवान बुद्ध की तपोभूमि और महावीर की जन्मस्थली की तस्वीर उभरती है. लेकिन इस नाम की जड़ें बहुत गहरी और ऐतिहासिक हैं.
बिहार नाम संस्कृत शब्द 'विहार' से लिया गया है. 'विहार' का मतलब होता है 'ठहरने की जगह'. प्राचीन काल में बिहार की धरती पर बौद्ध भिक्षुओं के लिए कई मठ और आश्रम बनाए गए थे, जिन्हें 'विहार' कहा जाता था.
ये विहार बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और शिक्षा के प्रमुख केंद्र थे. धीरे-धीरे, यह क्षेत्र 'विहारों की भूमि' के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जो बाद में 'बिहार' बन गया.
प्राचीन समय में खासकर मौर्य और गुप्त काल में बिहार बौद्ध धर्म का गढ़ था. पाटलिपुत्र, जो आज का पटना है उस समय मगध साम्राज्य की राजधानी था. बौद्ध भिक्षु इन विहारों में रहकर ध्यान, अध्ययन और शिक्षण का कार्य करते थे.
इन मठों की वजह से ही इस क्षेत्र को 'विहार' नाम मिला, जो समय के साथ 'बिहार' में बदल गया. इतना ही नहीं प्रचीन समय में इसे मगध के नाम से भी जाना जाता है इसके अलावा इसका अंग और वज्जी नाम भी था.
बिहार भारत का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है. आज बिहार अपनी समृद्ध संस्कृति, मधुबनी चित्रकला और लिट्टी-चोखा जैसे व्यंजनों के लिए जाना जाता है.