महीनों स्पेस में बिताते, फिर वहां कपड़े कैसे धोते हैं एस्ट्रोनॉट्स?

Astronauts Clothes: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर महीनों तक रहने में कुछ ऐसी चुनौतियां आती हैं जिनके बारे में धरती पर रहने वाले लोग शायद ही कभी सोचते हैं. इनमें से एक चुनौती है कपड़े धोना. अंतरिक्ष के माइक्रोग्रैविटी वाले माहौल में वाशिंग मशीन काम नहीं करती, पानी काफी कम होता है और हर किलोग्राम सामान कीमती होता है. आइए जानते हैं कि ऐसे हालातों में अंतरिक्ष यात्री अपने कपड़े कैसे धोते हैं.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में कोई वाशिंग मशीन नहीं होती क्योंकि माइक्रोग्रेविटी में कपड़े धोना काफी मुश्किल है और इसमें कीमती पानी और बिजली खर्च होगी.
अंतरिक्ष के कपड़े एंटीमाइक्रोबियल मटीरियल से बने होते हैं. यह बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है. इससे अंतरिक्ष यात्री धरती की तुलना में इन कपड़ों को काफी लंबे समय तक पहन सकते हैं.
आमतौर पर अंडरवियर 3-4 दिन, शर्ट 10 से 15 दिन और ट्राउजर 1 से 3 महीने तक पहने जाते हैं.
स्पेस स्टेशन का तापमान कंट्रोल में रहता है और धूल, मिट्टी या फिर प्रदूषण न होने की वजह से कपड़े काफी धीरे-धीरे गंदे होते हैं.
जब कपड़े काफी ज्यादा गंदे हो जाते हैं या फिर उनमें से बदबू आने लगती है तो अंतरिक्ष यात्री उन्हें साफ करने की कोशिश करने के बजाय कचरे के बैग में सील कर देते हैं.
सील किए बैग कार्गो स्पेसक्राफ्ट में रखे जाते हैं. ये अपना मिशन पूरा करने के बाद जानबूझकर पृथ्वी के वायुमंडल में जल जाते हैं. इससे कपड़े पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं.
स्पेसएक्स ड्रैगन और रूस के प्रोग्रेस जैसे स्पेसक्राफ्ट के जरिए पृथ्वी से लगातार नए कपड़े भेजे जाते हैं.
जैसे-जैसे अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा और मंगल ग्रह के लंबे मिशन की तैयारी कर रहे हैं स्पेस एजेंसियां पानी की बचत करने वाली लॉन्ड्री टेक्नोलॉजी और दोबारा इस्तेमाल होने वाले कपड़ों के सिस्टम पर भी रिसर्च कर रही है. ऐसा इसलिए ताकि कचरा और सामान का बोझ कम किया जा सके.