फ्री रेंज और पोल्ट्री के अंडों में क्या है अंतर, जानिए कौन सा एग वेज और कौन है नॉनवेज?

खान-पान को लेकर हमारे समाज में कई साल से बहस चली आ रही है, जिसमें सबसे बड़ा और उलझा हुआ सवाल यह है कि अंडा वेज है कि नॉनवेज? ज्यादातर लोग इसे आंख मूंदकर मांसाहार मान लेते हैं, क्योंकि पारंपरिक सोच यही है कि अंडे से चूजा निकलता है. लेकिन विज्ञान की कसौटी पर परखें तो हर अंडे की कहानी एक जैसी नहीं होती है. बाजार में मिलने वाले फ्री रेंज यानी देसी अंडा और कॉमर्शियल पोल्ट्री के अंडों के बनने का तरीका पूरी तरह से अलग है. चलिए जानें.
आमतौर पर किसी भी खाद्य पदार्थ को नॉनवेज तब माना जाता है जब उसे खाने के लिए किसी बेजुबान जानवर की जान ली जाए या जीव-हत्या हो. अंड़ों को मांसाहार की श्रेणी में रखने के पीछे भी यही तर्क दिया जाता है.
लोगों का मानना है कि अगर अंडों को न खाया जाए तो उसमें से एक नन्हा चूजा बाहर आ जाएगा. यानी अंडे को खाना, उस चूजे के पैदा होने से पहले ही उसकी जान लेने जैसा है. सदियों से इंसानों ने अंडों से बच्चों को निकलते हुए देखा है, इसलिए इस धारणा ने हमारे समाज और संस्कृति में इसकी गहरी जड़ें जमा दी हैं.
विज्ञान इस मामले में दिलचस्प हकीकत रखता है. असल में मुर्गी का हर अंडा चूजा नहीं बन सकता है, क्योंकि हर अंडे के अंदर भ्रूण नहीं होता है. आप अंडे को एक तरह से कुदरती पैकेट समझ सकते हैं.
मुर्गियों के शरीर की बनावट ऐसी होती है कि वे बिना किसी नर मुर्गे के संपर्क में आए भी नियमित रूप से अंडा देती हैं. इन अंडों को विज्ञान की भाषा में अनफर्टिलाइज्ड या अनिषेचित अंडा कहा जाता है. चूंकि इनमें मुर्गों का कोई योदगान नहीं होता है, इसलिए इनके अंदर चूजा बनने की गुंजाइश नहीं होती है.
अब फ्री रेंज या देसी अंडों की बात कर लेते हैं. फ्री रेंज का सीधा अर्थ होता है कि मुर्गियों को किसी बंद पिंजरे में रखने की बजाय खुले बाड़े या खेतों में घूमने दिया जाता है. ऐसे माहौल में मुर्गियां और मुर्गे साथ में रहते हैं.
जब मुर्गियां मुर्गों के संपर्क में आने के बाद अंडा देती हैं तो उन अंडों में से चूजा निकलने का पूरी चांस होता है. पुराने जमाने में यह पहचानना मुश्किल होता था कि किस अंडे में चूजा है और किसमें नहीं है, इसलिए एहतियात के तौर पर हर अंडे को नॉनवेज मान लिया गया.
इसके ठीक उलट आजकल बाजारों में बिकने वाले सफेद अंडे पोल्ट्री फार्म से आते हैं. इन आधुनिक फार्मों का नियम एकदम अलग होता है. यहां पर सिर्फ मुर्गियों को ही रखा जाता है. इसमें कोई भी मुर्गा मौजूद नहीं रहता है.
जब ये मुर्गियां बिना मुर्गों के संपर्क में आए अंडा देती हैं तो वह सिर्फ एक खाली प्रोटीन का पैकेट होता है. इन अंडों से कभी भी चाहकर चूजा नहीं निकलता है. यानी की तकनीकी रूप से इन अंडों को खाने से कोई भी जीव हत्या नहीं होती है. इसलिए ये अंडे शाकाहारी माने जाते हैं.