रंग ऑरेन्ज, फिर भी नाम ब्लैक बॉक्स? क्या है ऐसा करने की वजह
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियों को हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया के विमान का ब्लैक बॉक्स मिल गया है. इसकी तस्वीर भी सामने आई है, जो कि ऑरेंज कलर की है. अब आप सोच रह होंगे कि ऑरेन्ज रंग का होने के बाद भी इसे ब्लैक बॉक्स क्यों कहा जाता है?
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि किसी भी विमान हादसे की जांच में ब्लैक बॉक्स सबसे अहम रोल निभाता है. विमान हादसे के बाद जांच एजेंसियां सबसे पहले मलबे में ब्लैक बॉक्स की ही तलाश करती हैं, जिससे हादसे की वजह का पता चल सके.
ब्लैक बॉक्स के मिलने से जांच में तेजी तो आएगी ही, साथ ही यह भी पता चलेगा कि यह हादसा किस वजह से हुआ. जैसे-तकनीकी खराबी, इंजन फेल होने से, पक्षी टकराने से, विमान में आग लगने से या किसी मानवीय त्रुटि के कारण.
अब सवाल पर आते हैं. दरअसल, ब्लैक बॉक्स चमकीने ऑरेन्ज कलर की बेहद खास डिवाइस होती है. इसका रंग ऐसा इस वजह से होता है, जिससे मलबे में इसे आसानी से ढूंढा जा सके. यह एक तरह का रिकॉर्डर होता है, जो विमान की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करता है.
ये रिकॉर्डर मजबूत केसिंग से बंद होते हैं, जिन पर किसी तरह के विस्फोट, आग या पानी का असर नहीं पड़ता है और बड़े से बड़े हादसे में भी ब्लैक बॉक्स के अंदर रिकॉर्ड हुआ डेटा सुरक्षित रहता है.
इसके दो हिस्से होते हैं. पहला- फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और दूसरा- कॉकपिट वॉइस रिकॉर्ड (CVR). इन दोनों हिस्सों को मिलाकर ही ब्लैक बॉक्स बनता है. इन दोनों हिस्सों में सबकुछ रिकॉर्ड होता है, जिससे हादसे की वजह का पता चलता
ब्लैक बॉक्स को 1954 से हवाई जहाजों में लगाया जा रहा है. इसकी फीतरी दीवार काले रंग की होती है, जिस वजह से फोटो डेटा सुरक्षित रहता है. अंदर का रंग काला होने के कारण ही इसे ब्लैक बॉक्स कहा जाता है.