बिजली के आविष्कार ने बदला फर्स्ट और सेकेंड स्लीप का कॉन्सेप्ट, जाने 8 घंटे की कैसे हो गई हमारी नींद
दरअसल, आज से 400-500 साल पहले लोग 2 स्टेज स्लीप साइकल को फॉलो करते थे. इस समय लोग फर्स्ट स्लीप और सेकेंड स्लीप के अकॉर्डिंग सोया करते थे.
इस दौरान 7-8 बजे ही लोग डिनर करके पहली नींद लेने के लिए चले जाते थे. इसके बाद वे रात को 1 से 2 बजे तक उठते थे. इस समय वह अपने माइंडफुलनेस पर काम करते थे.
ऐसे में कोई इस समय प्रार्थना करता तो कोई किताबें पढ़ता था. इसके कुछ टाइम बाद लोग फिर से सोने के लिए जाते थे और अपनी सेकंड स्लीप पूरी करते थे. इसके बाद वह सुबह सूरज के निकलते ही उठ जाते और फ्रेश सुबह की शुरुआत करते थे.
सोने का यह तरीका बॉडी की नेचुरल रिदम के साथ चलता था. लेकिन रोशनी के इन्वेंशन के साथ सबकुछ बदल गया. पहले गैस लैंप्स, फिर आर्टिफिशियल लाइट्स और फिर इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन ने सबको जागना सिखा दिया.
अब सब लोग रात के अंधेरे में काम करने लगे और देर तक जागने लगे. ऐसे में अब रातें बस दिन की थकान उतारने का तरीका बन गई. ऐसे में एग्जॉस्शन भी काफी बढ़ गया.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय में जो लोग बीच रात में उठ जाते हैं उसका कारण क्या है? उसका कारण बॉडी की यही रिदम है, जो उसे आज भी याद है और ये बात कई एक्सपेरिमेंट्स में भी प्रूव हो चुकी है.
ऐसे में अगर रात के समय आपकी भी नींद खुल जाती है तो ये कोई भी बुरा संकेत या हेल्थ प्रॉब्लम नहीं है.