नर्वे के पूर्व पीएम को अमेरिका ने एक घंटे तक एयरपोर्ट पर रोके रखा
बताते चलें कि रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद एक शासकीय आदेश (executive order) पास किया. इस आदेश में सात मुस्लिम बहुल देशों- सीरिया, लीबिया, ईराक, ईरान, सूडान, सोमालिया और यमन के नागरिकों के अमेरिका प्रवेश पर 90 दिनों का बैन लगाया गया था. 90 दिनों के बाद इसकी समीक्षा की जानी थी. लेकिन अमेरिका की एक ज़िला अदालत ने ट्रंप के इस अफरा-तफरी मचाने वाले आदेश पर देशव्यापी रोक लगा दी है.
उन्होंने जानकारी दी कि उन्हें 40 मिनट तक कमरे में बिठाकर रखा गया जिसके बाद उनसे 20 मिनटों तक इस बारे में पूछताछ हुई कि उनके ईरान यात्रा का उद्देश्य क्या था, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि ये मानवाधिकार से जुड़ी यात्रा थी. उन्होंने इस बात पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिका की दुनियाभर में क्या साख रह जाएगी अगर उनके जैसे और यूरोपिये नेताओं के साथ ऐसा हुआ.
नर्वे के एक पूर्व पीए को अमेरिका के एयरपोर्ट पर महज़ इसलिए पूछताछ के लिए रोक लिया गया क्योंकि उन्होंने तीन साल पहले एक बार ईरान की यात्रा की थी. साल 1997-2000 और 2001-05 तक नॉर्वे के पीएम रहे Kjell Magne Bondevik नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट में शामिल होने के लिए यूरोप से अमेरिका पहुंचे थे.
वे आगे कहते हैं कि इतनी जानकारी इस बात के लिए काफी है कि वे अमेरिका के लिए कोई ख़तरा नहीं है और उन्हें तुरंत जाने देना चाहिए था. उन्होंने आगे जानकारी दी कि उन्हें एक ऐसे कमरे में बिठा दिया गया जिसमें मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के यात्री मौजूद थे. उन्हें भी निगरानी और जांच की वजह से कमरे में रखा गया था.
उन्होंने अपने एक बायन में कहा कि वे अमेरिका के उस डर को समझते हैं जिसमें देश में आतंकियों की घुसपैठ शामिल है लेकिन उनके हिसाब के अमेरिकी कस्टम अधिकारियों के लिए ये काफी होना चाहिए था कि उनके पास राजनयिक पासपोर्ट है, जिसपर लिखा है कि वे नॉर्वे के पूर्व पीएम रह चुके हैं.
अमेरिका के कस्टम अधिकारियों ने जब देखा कि उनके राजनयिक पासपोर्ट पर साल 2014 में ईरान जाने की जानकारी है, उसके बाद उन्हें एक घंटे के लिए रोके रखा. Bondevik का कहना है कि उनके पासपोर्ट पर साफ लिखा था कि वे नॉर्वे के पीएम रह चुके हैं.