Slap Day 2026: इन बॉलीवुड फिल्मों में लगे हैं सेलेब्स को जोड़दार थप्पड़, देख आप भी हो जाएंगे हैरान

कभी सोचा है फिल्मों में पड़ा एक थप्पड़ सिर्फ आवाज नहीं करता वो कहानी हिला देता है. कभी दोस्ती टूट जाती है कभी प्यार पर सवाल उठ जाता है तो कभी पूरा परिवार बिखर जाता है. बॉलीवुड में ऐसे कई थप्पड़ हुए हैं जिनकी गूंज आज भी लोगों को याद है. स्लैप डे के मौके पर चलिए याद करते हैं वो फिल्मी थप्पड़ जिन्होंने सिर्फ किरदारों को नहीं बल्कि लोगों की सोच को भी झकझोर कर रख दिया है.
बॉलीवुड में रोमांस और एक्शन तो खूब देखा होगा लेकिन कई बार एक जोरदार थप्पड़ पूरी कहानी बदल देता है. कुछ थप्पड़ ऐसे रहे हैं जिन्होंने रिश्ते तोड़ दिए कुछ ने सोच बदल दी और कुछ ने देशभर में बहस छेड़ दी. स्लैप डे के मौके पर बात करते हैं उन फिल्मों की जिनमें पड़े सबसे आइकॉनिक थप्पड़.
थप्पड़ (2020)- इस फिल्म का नाम ही सब कुछ बता देता है. जब पार्टी में विक्रम सबके सामने अमृता को थप्पड़ मारता है तो वहां मौजूद शोर से ज्यादा खामोशी गूंजती है. ये सिर्फ एक सीन नहीं था पूरी फिल्म उसी एक थप्पड़ के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म ने उस ‘चलता है’ वाली सोच को चैलेंज किया था जिसमें शादी में औरत की इज्जत को हल्के में लिया जाता है. यहां एक थप्पड़ ने पूरे रिश्ते की नींव हिला दी थी.
दिल चाहता है (2001)- आकाश और सिड की दोस्ती हर किसी को पसंद थी. लेकिन जब आकाश सिड के प्यार का मजाक उड़ाता है तो सिड का गुस्सा फूट पड़ता है और वो उसे थप्पड़ मार देता है. ये थप्पड़ नफरत का नहीं गहरे दुख का था. इसी पल से उनकी दोस्ती टूट जाती है और फिल्म एक नए इमोशनल मोड़ पर पहुंच जाती है.
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995)- जब चौधरी बलदेव सिंह को राज और सिमरन के बारे में तस्वीरों से पता चलता है तो गुस्से में वो राज को थप्पड़ मारते हैं. वो सीन आज भी लोगों को याद है. ये थप्पड़ सिर्फ गुस्से का नहीं था बल्कि परंपरा और प्यार के टकराव का प्रतीक बन गया था. इसी के बाद फिल्म का असली ड्रामा शुरू होता है.
कबीर सिंह (2019)- शायद मॉडर्न बॉलीवुड का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला थप्पड़ यही था. कबीर जब प्रीति को थप्पड़ मारता है तो पूरे देश में बहस छिड़ जाती है. कुछ लोगों ने इसे ‘इंटेंस लव’ कहते है तो कई लोगों ने इसे टॉक्सिक मर्दानगी बताते है. इस सीन ने दिखाया कि सिनेमा सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि सोच पर भी असर डालता है.
कभी खुशी कभी गम (2001)- यशवर्धन रायचंद का राहुल को थप्पड़ मारना फिल्म का सबसे इमोशनल पल था. ये थप्पड़ सिर्फ एक गुस्से का रिएक्शन नहीं था बल्कि उस परफेक्ट दिखने वाले परिवार के टूटने की शुरुआत थी. इसी के बाद राहुल घर छोड़ देता है और कहानी सालों की दूरी और फिर मिलन तक पहुंचती है.
जिंदगी ना मिलेगी दोबारा (2011)- जब इमरान अर्जुन का महंगा फोन कार से बाहर फेंक देता है तो अर्जुन का गुस्सा कंट्रोल से बाहर हो जाता है और वो थप्पड़ मार देता है. ये सिर्फ फोन का गुस्सा नहीं था बल्कि सालों की नाराजगी थी जो बाहर आई थी. इसी पल के बाद दोस्त अपने पुराने जख्मों का सामना करते हैं.
हेरा फेरी (2000)- हर थप्पड़ दर्दनाक नहीं होता है. बाबूराव गणपतराव आप्टे के राजू को मारे गए थप्पड़ आज भी लोगों को हंसा देते हैं. 'स्टाइल है बाबू भैया!' वाली लाइन के साथ ये थप्पड़ फिल्म की कॉमिक टाइमिंग का हिस्सा बन गया था. यहां थप्पड़ दुख नहीं हंसी लाता है.