कमबैक में ही मचा दिया बवाल! सनी देओल-रणवीर सिंह से छीन ली लाइमलाइट

बॉलीवुड में स्टारडम जितनी तेजी से मिलता है, उतनी ही जल्दी कम भी हो जाता है. लेकिन कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो समय के साथ और निखरकर सामने आते हैं. अक्षय खन्ना भी उन्हीं में से एक हैं, जिन्होंने अपने शांत अंदाज और दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई. लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहने के बाद भी उन्होंने ऐसा कमबैक किया कि हर कोई हैरान रह गया. सालों से इंडस्ट3ी में शुमार एक्टर्स जैसे रणबीर कपूर और सनी देओल को भी उन्होंने पछाड़ दिया. 2025 उनके करियर का सबसे मजबूत साल बनकर सामने आया. 28 मार्च को अक्षय अपना 51वां जन्मदिन सेलिब्रेट करने वाले हैं, इसी बीच आइए उनके करियर के बारे में जानते हैं.
28 मार्च 1975 को जन्मे अक्षय खन्ना ने कभी भी अपने पिता और दिवंगत एक्टर विनोद खन्ना की पहचान का सहारा नहीं लिया. उन्होंने शुरुआत से ही अपनी अलग राह चुनी और अपने टैलेंट के दम पर आगे बढ़े. इंडस्ट्री में टिके रहना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने धैर्य और मेहनत से अपनी जगह बनाई.
अक्षय ने 1997 में फिल्म 'हिमालय पुत्र' से डेब्यू किया, जो सफल नहीं हो पाई. लेकिन इस असफलता ने उन्हें और मजबूत बना दिया. उन्होंने खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया और अगली फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचा.
उसी साल आई 'बॉर्डर' ने अक्षय को असली पहचान दिलाई. फिल्म में उनका किरदार छोटा लेकिन असरदार था. देशभक्ति से भरे उनके सीन आज भी लोगों को याद हैं. इस फिल्म ने उन्हें गंभीर अभिनेता के तौर पर पहचान दिलाई.
साल 2001 में आई 'दिल चाहता है' उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. इसमें उन्होंने 'सिड' का किरदार निभाया, जो शांत और इमोशनल था. उस समय जब एक्शन का दौर था, उन्होंने अलग रास्ता चुना.
अक्षय खन्ना सिर्फ एक तरह के रोल तक सीमित नहीं रहे. 'हमराज' में निगेटिव रोल, 'हंगामा' में कॉमेडी और 'रेस' में स्टाइलिश किरदार निभाकर उन्होंने अपनी वर्सेटिलिटी साबित की.
एक समय ऐसा आया जब अक्षय खन्ना अचानक फिल्मों से गायब हो गए और 2012 से 2016 तक वो स्क्रीन से दूर रहे. इस दौरान कई लोगों ने मान लिया कि उनका करियर खत्म हो गया है. लेकिन उन्होंने वापसी के लिए खुद को तैयार किया.
वापसी के बाद उन्होंने इत्तेफाक, मॉम और दृश्यम 2 में दमदार किरदार निभाए. इसके बाद धुरंधर में 'रहमान डकैत' और छावा में 'औरंगजेब' बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि असली कलाकार कभी खत्म नहीं होता, बस सही मौके का इंतजार करता है.