52 की उम्र में भी सुपरफिट हैं जॉन अब्राहम, एक दिन भी मिस नहीं करते जिम, जानें कैसे बनाए सिक्स पैक एब्स

बॉलीवुड में अगर किसी अभिनेता को फिटनेस आइकॉन कहा जाए, तो उसमें सबसे पहला नाम जॉन अब्राहम का आता है. 52 साल की उम्र में भी उनकी मस्कुलर फिजीक और एनर्जी देखकर लोग हैरान रह जाते हैं. हाल ही में जॉन ने अपनी फिटनेस फिलॉसफी शेयर की, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए उनका शरीर ही उनका धर्म है. उनका मानना है कि बॉडी इज़ टेंपल, यानी शरीर मंदिर की तरह होता है और अगर आप इसका ध्यान रखेंगे, तो ये जिंदगी भर आपका साथ देगा.
जॉन अब्राहम के लिए फिटनेस कोई शॉर्ट टर्म गोल नहीं है, बल्कि ये उनकी लाइफ का हिस्सा है. वो किसी फिल्म रोल या फोटोशूट के लिए अचानक डाइट या वर्कआउट शुरू नहीं करते. बल्कि पिछले करीब 35 सालों से वो बिना ब्रेक के जिम जा रहे हैं.
खुद जॉन मानते हैं कि उन्होंने शायद ही कभी वर्कआउट स्किप किया हो. चाहे तबीयत थोड़ी खराब हो, हेडेक हो या थकान, वो हेवी ट्रेनिंग न सही लेकिन लाइट वर्कआउट जरूर करते हैं, ताकि रूटीन न टूटे. उनके मुताबिक, कंसिस्टेंसी ही असली सीक्रेट है.
जॉन का वर्कआउट सिर्फ हेवी वेट लिफ्टिंग तक सीमित नहीं है. उनके ट्रेनर विनोद चन्ना बताते हैं कि उम्र के साथ वर्कआउट स्टाइल को स्मार्ट बनाना बहुत जरूरी है. इसी वजह से जॉन की रूटीन में अब स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ-साथ फंक्शनल ट्रेनिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज, कार्डियो और कंडीशनिंग भी शामिल हैं.
इसका मकसद सिर्फ मसल्स बनाना नहीं, बल्कि बॉडी को एजाइल, फ्लेक्सिबल और इंजरी फ्री रखना है. जॉन चाहते हैं कि उनका शरीर हर तरह की मूवमेंट के लिए तैयार रहे, न कि सिर्फ मिरर मसल्स के लिए.
डाइट के मामले में भी जॉन काफी डिसिप्लिंड हैं. वो फैड डाइट या एक्सट्रीम कटिंग में विश्वास नहीं करते. उनका फोकस क्लीन फूड, बैलेंस्ड न्यूट्रिशन और सही रिकवरी पर रहता है.
उनके लिए स्लीप और रेस्ट डेज भी उतने ही इंपॉर्टेंट हैं जितना वर्कआउट. जॉन मानते हैं कि अगर बॉडी को रिकवरी नहीं मिलेगी, तो प्रोग्रेस भी नहीं होगी. यही वजह है कि वो फिटनेस को पनिशमेंट नहीं बल्कि लाइफस्टाइल की तरह देखते हैं.
जॉन अब्राहम की सोच ये है कि फिटनेस मोटिवेशन से नहीं, माइंडसेट से चलती है. मोटिवेशन आए या न आए, डिसिप्लिन बना रहना चाहिए. वो कहते हैं कि अगर आप अपने शरीर का सम्मान करेंगे, तो उम्र कभी आपके रास्ते में रुकावट नहीं बनेगी. 50 प्लस एज में भी जॉन जिस कॉन्फिडेंस और पावर के साथ स्क्रीन पर नजर आते हैं, वो इसी लॉन्ग टर्म फिटनेस कमिटमेंट का रिजल्ट है.
आज जॉन अब्राहम सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए इंस्पिरेशन हैं जो ये मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ फिटनेस खत्म हो जाती है. उनका सफर ये साबित करता है कि अगर डेडिकेशन, सही ट्रेनिंग और डिसिप्लिंड लाइफस्टाइल हो, तो एज सिर्फ एक नंबर बनकर रह जाती है.