अखिलेश यादव का राष्ट्रीय राजनीति में कमबैकः SP चीफ के सामने हैं ये काम, क्या हासिल कर पाएंगे बड़ा नाम?
करहल (यूपी में) विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर दिवंगत मुलायम सिंह यादव के बेटे ने यह साफ कर दिया कि वह फिर से नेशनल पॉलिटिक्स में कदम बढ़ाने जा रहे हैं.
चूंकि, अखिलेश यादव यूपी विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष भी थे. विधायकी छोड़ने के बाद यह पद भी खाली हो गया है. ऐसे में यह पद किसे मिलेगा? इस पर सबकी नजरें हैं.
सपा चीफ अखिलेश यादव को न सिर्फ यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता का नाम तय करना है बल्कि विधानसभा के उप-चुनावों के लिए भी उम्मीदवारों का चयन करना है.
दरअसल, यूपी विधानसभा के 10 विधायक इस बार के लोकसभा चुनाव 2024 में सांसद चुने गए हैं, जिससे वे सीटें खाली हुई हैं. इन्हीं को भरने के लिए अब उपचुनाव होंगे.
संसद के निचले सदन में सपा के पास तीसरी सबसे बड़ी संख्या में सांसद (37) हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो अखिलेश यादव का सपना सपा को राष्ट्रीय फलक तक ले जाने का है.
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि अखिलेश यादव की ख्वाहिश दिल्ली से ही पूरी हो सकती है. सपा जो सफलता पूर्व में हासिल नहीं पा पाई, उसके लिए उसने कदम बढ़ाए हैं.
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, अखिलेश यादव केंद्र में अपने दम पर खुद को विपक्ष का एक मजबूत नेता साबित करना चाहेंगे. वह यूपी में 2027 के लिहाज से फोकस करेंगे.