सिर्फ स्किल ही नहीं, 10वीं-12वीं के मार्क्स भी क्यों जरूरी होते हैं? समझिए पूरा कारण

आज के दौर में हर जगह स्किल की बात होती है, लेकिन जब बात कॉलेज एडमिशन या नौकरी की आती है, तो 10वीं और 12वीं के मार्क्स भी उतने ही अहम नजर आते हैं. यही कारण है कि छात्रों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर इन नंबरों का महत्व क्यों बना रहता है. आइए स्पष्ट तरीके से समझते हैं.
जब भी कोई छात्र कॉलेज में एडमिशन लेने जाता है या किसी नौकरी के लिए आवेदन करता है, तो सबसे पहले उसकी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट देखी जाती है. कई बार इंटरव्यू में भी इन अंकों के बारे में सवाल किए जाते हैं, जिससे यह साफ होता है कि इनकी भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है.
दरअसल, ये अंक केवल परीक्षा के नंबर नहीं होते, बल्कि यह बताते हैं कि छात्र ने पढ़ाई के दौरान कितनी मेहनत और अनुशासन बनाए रखा. इससे यह अंदाजा लगाया जाता है कि वह लंबे समय तक किसी लक्ष्य पर कितना फोकस कर सकता है.
मार्क्स यह भी दिखाते हैं कि छात्र समय का प्रबंधन कैसे करता है और कठिन परिस्थितियों में उसका प्रदर्शन कैसा रहता है.यानी ये आपके व्यवहार, स्थिरता और मेहनत की झलक भी पेश करते हैं.
करियर की शुरुआत में इन अंकों की अहम भूमिका होती है. कई कॉलेजों में एडमिशन के लिए न्यूनतम प्रतिशत तय होता है, वहीं सरकारी और निजी नौकरियों में भी शुरुआती स्तर पर इन्हीं नंबरों को आधार बनाया जाता है.
हालांकि समय के साथ जब छात्र आगे की पढ़ाई पूरी कर लेता है या अनुभव हासिल कर लेता है, तो इन अंकों का महत्व कम हो जाता है. इसके बाद स्किल, अनुभव और काम करने की क्षमता ज्यादा मायने रखती है.
फिर भी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट हमेशा काम आने वाला दस्तावेज होती है. यह आपकी शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ पहचान और जन्मतिथि का भी प्रमाण देती है, जो कई सरकारी और आधिकारिक कामों में जरूरी होता है.