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विदेश में पढ़ाई का क्रेज बढ़ा, CBSE से ज्यादा स्टेट बोर्ड के छात्र तलाश रहे मौके

कविता गाडरी   |  12 Sep 2026 06:48 AM (IST)
विदेश में पढ़ाई का क्रेज बढ़ा, CBSE से ज्यादा स्टेट बोर्ड के छात्र तलाश रहे मौके

विदेश जाकर पढ़ाई करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के प्रोफाइल में बदलाव देखने को मिल रहा है. अब अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए सिर्फ बड़े शहरों या सीबीएसई जैसे बोर्ड से आने वाले छात्र ही आगे नहीं है, बल्कि स्टेट बोर्ड के विद्यार्थी भी तेजी से विदेश में पढ़ाई का ऑप्शन तलाश रहे हैं. ट्रांसलेशन एजुकेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार विदेश में पढ़ाई की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों में 56 प्रतिशत स्टेट बोर्ड से हैं, जबकि सीबीएसई से आने वाले छात्रों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत हैं.

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यह रिपोर्ट एडटेक कंपनी अपग्रेड की ओर से तैयार की गई है और इसमें जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच काउंसलिंग लेने वाले 53,800 छात्रों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. इसमें 65.8 प्रतिशत थे, जबकि 60 प्रतिशत छात्र टियर 2 और टियर 3 शहरों से आए.

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रिपोर्ट के अनुसार विदेश में पढ़ाई करने का फैसला लेने के पीछे छात्रों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बेहतर रोजगार है. करीब 49 प्रतिशत छात्रों ने नौकरी के बेहतर अवसरों को विदेश जाने की मुख्य वजह बताया.

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इसके बाद 24 प्रतिशत छात्रों ने शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिक कारण माना. वहीं 15 प्रतिशत छात्र स्थायी निवास के अवसरों को ध्यान में रखकर विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं. करीब 11 प्रतिशत ने बेहतर लाइफस्टाइल को इसकी वजह बताया. जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्र केवल किसी देश या संस्थान की लोकप्रियता देखकर फैसला नहीं कर रहे. वह पढ़ाई पर होने वाले खर्च के बदले मिलने वाले करियर से जुड़े फायदे, नौकरी और फ्यूचर की संभावनाओं को भी अहमियत दे रहे हैं. बब

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विदेश में पढ़ाई के लिए जर्मनी 2026 में सबसे पसंदीदा देश बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार 48 प्रतिशत छात्रों ने जर्मनी को अपनी पसंद बताया, जबकि 20 प्रतिशत की पसंद अमेरिका रहा. 2023 की तुलना में जर्मनी को लेकर छात्रों की पसंद लगभग दोगुनी हुई है. रिपोर्ट में इसके पीछे, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक देशों में बढ़ती लागत और कड़े होते इमिग्रेशन नियमों को एक वजह बताया गया है.

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जर्मनी के साथ फिनलैंड, स्पेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में भी छात्रों की रुचि बढ़ रही है. इन देशों को लेकर कम लागत, इंडस्ट्री से जुड़ाव और रोजगार से जुड़े अवसरों के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं.

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विदेशी शिक्षा चुनते समय खर्च भी छात्रों के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है. रिपोर्ट में शामिल 10 में से करीब 7 छात्रों ने बताया कि उनका बजट 30 लाख रुपये से कम है. 2024 से 2026 के बीच 20 से 30 लाख रुपये के बजट वाले ऑप्शन में छात्रों की रुचि बढ़ी है. इसी अवधि में टियर 2 और टियर 3 शहरों से विदेश में पढ़ाई को लेकर मांग भी बढ़ी.

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वहीं विदेश में पढ़ाई के लिए चुने जा रहे कोर्स पर भी रोजगार बाजार का असर दिख रहा है. रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग से जुड़े प्रोग्राम तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि अलग-अलग क्षेत्रों एआई से जुड़ी स्किल्स की मांग बढ़ने के कारण छात्र भी ऐसे प्रोग्राम चुनने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

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