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पढ़ लिखकर क्या करोगी से IAS बनने तक, जानें श्वेता अग्रवाल की प्रेरणादायक कहानी

हुगली जिले के भद्रेश्वर के साधारण परिवार में पली-बढ़ी श्वेता ने समाज की बंदिशों को तोड़ कर अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया. आईएएस बनने से पहले भी श्वेता ने दो बार यूपीएससी की परीक्षा पास की थी.

हुगली जिले के भद्रेश्वर के साधारण परिवार में पली-बढ़ी श्वेता ने समाज की बंदिशों को तोड़ कर अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया. आईएएस बनने से पहले भी श्वेता ने दो बार यूपीएससी की परीक्षा पास की थी.

पढ़ लिख कर क्या करोगी, आखिर में तो चौका-बर्तन ही करना है. ऐसी लाइन अक्सर हमारे समाज में लड़कियों को सुनने को मिलती है. वहीं ऐसी ही बातें पश्चिम बंगाल की श्वेता अग्रवाल ने भी पढ़ाई के दौरान अपने आसपास के लोगों से सुनी थी. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यही लड़की एक दिन देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी को बार-बार पास करके आईएएस अधिकारी बनेगी. एक साधारण परिवार से आने वाली श्वेता ने सामाजिक सोच, शादी के दबाव और शुरुआती सफलताओं के बीच अपने टारगेट को नहीं छोड़ा.

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दरअसल हुगली जिले के भद्रेश्वर के साधारण परिवार में पली-बढ़ी श्वेता के पिता किराने की दुकान चलाते थे. परिवार में शुरुआत से लड़कियों की पढ़ाई को लेकर उत्साह नहीं था और उनके जन्म के समय परिवार बेटी की उम्मीद कर रहा था. इसके बावजूद उनके माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. श्वेता ने अच्छी पढ़ाई, नौकरी की और फिर अपने प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने के लिए नौकरी तक छोड़ दी. इसके बाद शुरू हुआ उनका यूपीएससी का ऐसा सफर, जिसमें उन्हें एक बार नहीं तीन बार परीक्षा पास करनी पड़ी. तब जाकर आईएएस बनने का सपना पूरा हुआ.
दरअसल हुगली जिले के भद्रेश्वर के साधारण परिवार में पली-बढ़ी श्वेता के पिता किराने की दुकान चलाते थे. परिवार में शुरुआत से लड़कियों की पढ़ाई को लेकर उत्साह नहीं था और उनके जन्म के समय परिवार बेटी की उम्मीद कर रहा था. इसके बावजूद उनके माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. श्वेता ने अच्छी पढ़ाई, नौकरी की और फिर अपने प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने के लिए नौकरी तक छोड़ दी. इसके बाद शुरू हुआ उनका यूपीएससी का ऐसा सफर, जिसमें उन्हें एक बार नहीं तीन बार परीक्षा पास करनी पड़ी. तब जाकर आईएएस बनने का सपना पूरा हुआ.
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बताया जाता है कि श्वेता अग्रवाल अपने परिवार में ग्रेजुएशन करने वाली पहली लड़की थी. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद श्वेता ने एक कंपनी में नौकरी शुरू की. उनके पास अच्छी नौकरी थी, लेकिन श्वेता का टारगेट पहले से तय था. वह सिविल सर्विस में जाना चाहती थी, इसी टारगेट को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में लग गई.
बताया जाता है कि श्वेता अग्रवाल अपने परिवार में ग्रेजुएशन करने वाली पहली लड़की थी. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद श्वेता ने एक कंपनी में नौकरी शुरू की. उनके पास अच्छी नौकरी थी, लेकिन श्वेता का टारगेट पहले से तय था. वह सिविल सर्विस में जाना चाहती थी, इसी टारगेट को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में लग गई.
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इस दौरान उन्हें असफलताओं के साथ मानसिक दबाव और परिवार व सामाजिक की तरफ से शादी का दबाव भी झेलना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और हर प्रयास के साथ खुद को बेहतर करने की कोशिश पर ध्यान दिया. श्वेता ने 2013 में पहली बार यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम में हिस्सा लिया. इस प्रयास में उन्हें ऑल इंडिया 497वीं रैंक हासिल की. इस रैंक के आधार पर उनका चयन इंडियन रेवेन्यू सर्विस में हुआ. यह अपने आप में बड़ी सफलता थी. लेकिन श्वेता का टारगेट आईआरएस नहीं था, वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती थी.
इस दौरान उन्हें असफलताओं के साथ मानसिक दबाव और परिवार व सामाजिक की तरफ से शादी का दबाव भी झेलना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और हर प्रयास के साथ खुद को बेहतर करने की कोशिश पर ध्यान दिया. श्वेता ने 2013 में पहली बार यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम में हिस्सा लिया. इस प्रयास में उन्हें ऑल इंडिया 497वीं रैंक हासिल की. इस रैंक के आधार पर उनका चयन इंडियन रेवेन्यू सर्विस में हुआ. यह अपने आप में बड़ी सफलता थी. लेकिन श्वेता का टारगेट आईआरएस नहीं था, वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती थी.
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इसके बाद दूसरे प्रयास में श्वेता ने अपने रैंक में काफी सुधार किया. उन्होंने 141 वीं रैंक हासिल की और उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ. एक बार फिर उनके सामने सरकारी सेवा का प्रतिष्ठित पद था, लेकिन उनके मन में अभी भी आईएएस बनने की इच्छा बाकी थी.
इसके बाद दूसरे प्रयास में श्वेता ने अपने रैंक में काफी सुधार किया. उन्होंने 141 वीं रैंक हासिल की और उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ. एक बार फिर उनके सामने सरकारी सेवा का प्रतिष्ठित पद था, लेकिन उनके मन में अभी भी आईएएस बनने की इच्छा बाकी थी.
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उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की. लगातार दो सफल प्रयासों के बावजूद मनचाही सेवा नहीं मिलने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी. उनके हर प्रयास अपने टारगेट की तरफ बढ़ने का एक और कदम था. इसके बाद 2016 में श्वेता ने एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी. इस बार उनकी मेहनत का परिणाम उनकी उम्मीद के अनुसार आया. उन्होंने ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल की और आखिरकार आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया
उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की. लगातार दो सफल प्रयासों के बावजूद मनचाही सेवा नहीं मिलने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी. उनके हर प्रयास अपने टारगेट की तरफ बढ़ने का एक और कदम था. इसके बाद 2016 में श्वेता ने एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी. इस बार उनकी मेहनत का परिणाम उनकी उम्मीद के अनुसार आया. उन्होंने ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल की और आखिरकार आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया
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उनकी उपलब्धि के साथ वह उस साल पश्चिम बंगाल की स्टेट टॉपर भी बनी. रिपोर्ट के अनुसार करीब एक दशक बाद पश्चिम बंगाल से किसी उम्मीदवार ने यूपीएससी में टॉप 20 में जगह बनाई थी. इस तरह श्वेता ने यूपीएससी की परीक्षा तीन बार पास की. पहली बार 497 वीं रैंक के साथ आईआरएस दूसरी बार 141वीं रैंक के साथ आईपीएस और तीसरी बार ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल करके आईएएस अधिकारी बनीं 
उनकी उपलब्धि के साथ वह उस साल पश्चिम बंगाल की स्टेट टॉपर भी बनी. रिपोर्ट के अनुसार करीब एक दशक बाद पश्चिम बंगाल से किसी उम्मीदवार ने यूपीएससी में टॉप 20 में जगह बनाई थी. इस तरह श्वेता ने यूपीएससी की परीक्षा तीन बार पास की. पहली बार 497 वीं रैंक के साथ आईआरएस दूसरी बार 141वीं रैंक के साथ आईपीएस और तीसरी बार ऑल इंडिया 19वीं रैंक हासिल करके आईएएस अधिकारी बनीं 

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