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46 लाख की नौकरी ठुकराई, 7 बार एसएसबी में फेल; फिर ऐसे आर्मी ऑफिसर बने शारदेंदु

कविता गाडरी   |  09 Sep 2026 08:20 PM (IST)
46 लाख की नौकरी ठुकराई, 7 बार एसएसबी में फेल; फिर ऐसे आर्मी ऑफिसर बने शारदेंदु

आज के समय में किसी भी युवा के सामने अगर 46 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी हो और इसके साथ एयरबस जैसी बड़ी एयरोस्पेस कंपनी में काम करने का मौका भी मिल रहा हो तो शायद ही कोई उसे नौकरी को छोड़ने का फैसला करेगा. लेकिन लखनऊ के 27 वर्षीय शारदेंदु तिवारी ने अपने लिए इससे बिल्कुल अलग रास्ता चुना. अमेजॉन के क्लाउड इंजीनियरिंग के तौर पर काम करने वाले शारदेंदु ने कॉर्पोरेट करियर की अच्छी नौकरी के बावजूद भारतीय सेना में जाने का सपना नहीं छोड़ा. खास बात यह है कि सेना में पहुंचने से पहले उन्हें लगातार सात बार असफलताओं का सामना करना पड़ा. लेकिन आठवीं कोशिश में आखिरकार उनका चयन हो गया

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जब ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी गया में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शारदेंदु सेना में अधिकारी के तौर पर कमीशन होने जा रहे थे तो उनके सफर में एक टेक्नोलॉजी की पढ़ाई और बड़ी कंपनियों का एक्सपीरियंस है, तो दूसरी तरफ बचपन से ही सेना में जाने की इच्छा और पिता से मिली प्रेरणा की वजह से उनकी कहानी चर्चा में आ गई.

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शारदेंदु तिवारी लखनऊ के नीलमथा इलाके के रहने वाले हैं. उनका परिवार मूल रूप से सुल्तानपुर के पीपरगांव से जुड़ा है. सेना से उनका रिश्ता बचपन से ही रहा. उनके पिता ऑनरेरी कैप्टन राजकुमार तिवारी ने आर्मी सर्विसेज कॉर्प्स में करीब 36 साल तक सेवाएं दी.

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पिता को लंबे समय तक सेना की वर्दी में देखकर शारदेंदु के मन में भी सशस्त्र बलों में जाने की इच्छा बनी. यही वजह है कि जब उनके पास टेक्नोलॉजी सेक्टर में आगे बढ़ाने के लिए मजबूत ऑप्शन मौजूद थे, तब भी उन्होंने सेना के अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी.

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शारदेंदु ने शुरुआती पढ़ाई हरियाणा के केंद्रीय विद्यालय चंडीमंदिर से की. इसके बाद पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीई किया. उन्होंने आगे कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी में एमटेक की डिग्री हासिल की.

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पढ़ाई के बाद उन्होंने टेक्नोलॉजी सेक्टर में करियर शुरू किया और अमेजन में क्लाउड इंजीनियरिंग के तौर पर काम किया. यहां उन्हें करीब 46 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिल रहा था. इसके अलावा एयरबस से भी उनके पास नौकरी का अवसर था. यानी उनके सामने कॉर्पोरेट दुनिया में आगे बढ़ाने के लिए कई रास्ते खुले थे, लेकिन उन्होंने सेना को चुना.

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सेना में अधिकारी बनने की राह शारदेंदु के लिए आसान नहीं रही. उन्होंने सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की परीक्षा में कुल आठ बार हिस्सा लिया. शुरुआती साथ प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने सेना में जाने की कोशिश बंद नहीं की. वहीं आठवीं बार उन्होंने आखिरकार परीक्षा पास कर ली. टेक्निकल एंट्री के जरिए भारतीय सेना में उनका चयन हुआ. इस रास्ते में उनकी टेक्निकल एजुकेशन और सेना में करियर को एक साथ जोड़ने का मौका मिला.

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ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी गया में ट्रेनिंग के दौरान शारदेंदु की नेतृत्व क्षमता भी सामने आई. उन्हें सीनियर अंडर ऑफिसर बनाया गया, जो अकैडमी में कैडेट्स को मिलने वाली प्रमुख जिम्मेदारी में से एक था. ट्रेनिंग के अलावा शारदेंदु को बास्केटबॉल और ट्रेनिंग खेलना पसंद है. 

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