भारत का वह ऑफिसर गांव, जहां से बड़ी संख्या में निकलते हैं IAS-IPS अधिकारी

Officer Village of India: हमारे देश में अक्सर कहा जाता है कि भारत की असली ताकत उसके गांवों में बसती है. उत्तर प्रदेश और राजस्थान के दो ऐसे गांव इस कहावत को एक अलग पहचान देते हैं, जिन्होंने वर्षों से बड़ी संख्या में आईएएस, आईपीएस और दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों को देश को दिया है. उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का माधोपट्टी और राजस्थान की नीम का थाना जिले का नया बास आज ऑफिसर गांव के नाम से जाने जाते हैं. इन गांव की पहचान सिर्फ उनकी आबादी से नहीं बल्कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की मजबूत परंपरा से बनी है.
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला मुख्यालय से करीब 6 किलोमीटर दूर स्थित माधोपट्टी एक छोटा सा गांव है. यहां करीब 75 से 80 परिवार और लगभग 4000 की आबादी रहती है. इसके बावजूद यह गांव देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है.
स्थानीय लोगों के अनुसार इस गांव से अब तक करीब 47 आईएएस और आईपीएस अधिकारी निकल चुके हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में पीसीएस अधिकारियों ने भी यही से अपनी शुरुआत की. गांव के पहले आईएएस अधिकारी विनय कुमार बने जिनके बाद डॉक्टर इंदु प्रकाश ने सिविल सेवा में सफलता हासिल की. इन दोनों की सफलता ने गांव के बच्चों के लिए नहीं राहख खोल दी और धीरे-धीरे प्रशासनिक सेवा यहां के युवाओं का प्रमुख टारगेट बन गई.
माधोपट्टी की सबसे चर्चित कहानी डॉक्टर सजल कुमार सिंह के परिवार की है. इस परिवार से अलग-अलग पीढ़ियों में 11 आईएएस अधिकारी बने. परिवार के चार सगे भाइयों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई, जबकि अन्य रिश्तेदार भी सिविल सेवाओं में चयनित हुई है.
ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में भी इस परिवार में तीन आईएएस और छह पीसीएस अधिकारी है. परिवार के सदस्य बताते हैं कि बच्चों की शिक्षा पर हमेशा विशेष ध्यान दिया गया और अधिकांश अभ्यर्थियों ने प्रयागराज में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की.
माधोपट्टी की सफलता का कारण केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि वहां का माहौल भी माना जाता है. गांव में बच्चों को बचपन से ही अनुशासन, मेहनत और सरल जीवन का महत्व सिखाया जाता है. बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रयागराज जाते हैं. वहीं जो अभ्यर्थी चयनित नहीं हो पाए, वे भी अगले बैच के छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं. इसी सहयोग की संस्कृति ने गांव में लगातार सफलता की परंपरा बनाए रखी है.
दूसरी और राजस्थान के नीम का थाना जिले का नया बास भी देश के सबसे चर्चित ऑफिसर गांव में शामिल है. कभी चोरी और डकैती जैसी घटनाओं के लिए पहचाने जाने वाले इस गांव की तस्वीर शिक्षा ने पूरी तरह बदल दी.
करीब 800 परिवारों वाले इस गांव में अब तक 500 से ज्यादा सरकारी अधिकारी निकल चुके हैं, जिनमें 15 जिला कलेक्टर, पांच पुलिस अधीक्षक और तीन भारतीय वन सेवा अधिकारी शामिल है. इसके अलावा गांव के 1600 से ज्यादा लोग सरकारी नौकरियों में काम करते हैं.
ग्रामीणों के अनुसार 1972 में इस गांव के रहने वाले केएल मीणा का चयन इंटेलिजेंस ब्यूरो में सब इंस्पेक्टर के रूप में हुआ था. इस दौरान गांव में हुई एक चोरी की जांच के दौरान पुलिस के व्यवहार से ग्रामीण काफी आहत हुए. इसके बाद केएल मीणा ने यूपीएससी परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफल होकर शेखावाटी क्षेत्र के पहले आईएएस अधिकारी बने. उनकी सफलता ने पूरे गांव की सोच बदल दी. इसके बाद शिक्षा और सरकारी सेवा गांव की नई पहचान बन गई. आज स्थिति यह है कि परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद हर संभव प्रयास करते हैं.