यूपीएससी क्लियर करने वाले कैंडिडेट्स का कैसे तय होता है कैडर, क्या है इसका प्रोसेस?
सिविल सेवा परीक्षा पास करना किसी भी उम्मीदवार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है. लेकिन इसके बाद एक अहम प्रक्रिया शुरू होती है जिसे केडर एलोकेशन कहा जाता है. इसी के जरिए तय होता है कि चुने गए अधिकारी को किस राज्य या संयुक्त कैडर में अपनी सेवा देनी होगी और उनके करियर का बड़ा हिस्सा किस राज्य में बीतेगा.
आमतौर पर कैडर तय करते समय तीन मुख्य बातों को ध्यान में रखा जाता है. जिसमें पहली उम्मीदवार की यूपीएससी रैंक, दूसरी उम्मीदवार की ओर से दी गई राज्यों की पसंद और तीसरी अलग-अलग राज्यों में उपलब्ध वैकेंसी होती है. इन सभी के आधार पर केंद्र सरकार अधिकारी को किसी राज्य या संयुक्त कैडर में नियुक्त करती है.
वहीं ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों के कैडर तय करने की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रालय के पास होती है. जैसे आईएएस अधिकारियों का कैडर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तय करता है. वहीं आईपीएस अधिकारियों का कैडर गृह मंत्रालय तय करता है और आईएफएस अधिकारियों का कैडर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देखता है.
इसके अलावा कुछ समय पहले कैडर एलोकेशन सिस्टम में बदलाव भी किया गया है. पहले देश को 5 जोन में बांटा गया था, लेकिन अब चार ग्रुप सिस्टम लागू किया गया है. इसमें पहले ग्रुप में एजीएमयूटी, आंध्र प्रदेश, असम, मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ शामिल है. दूसरे ग्रुप में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश को शामिल किया गया है.
तीसरे ग्रुप में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु को शामिल किया गया है. वहीं चौथे ग्रुप में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है. उम्मीदवारों पहले इन ग्रुप को अपनी प्राथमिकता के क्रम में चुनते हैं और फिर इस ग्रुप के अंदर अपनी पसंद के राज्य बताते हैं.
इसके अलावा कैडर एलोकेशन में 33-66 का इनसाइडर आउटसाइडर नियम लागू होता है. इसका मतलब यह है कि किसी राज्य के कैडर में लगभग एक तिहाई सीटें उसी राज्य के उम्मीदवारों को मिलती है. जबकि बाकी दो तिहाई सीटें दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों को दी जाती है.
अगर किसी उम्मीदवार को अपने ही राज्य का कैडर मिल जाता है, तो उसे इनसाइडर कहा जाता है. वहीं किसी को दूसरे राज्य का कैडर मिलने पर वह आउटसाइडर माना जाता है.
वहीं कैडर एलोकेशन में साइकिल सिस्टम भी लागू किया जाता है. इसमें उम्मीदवारों को 25-25 के समूह में बांटा जाता है. जैसे 1-25, 26-50 और इस तरह आगे. हर साइकिल में एक-एक उम्मीदवार को अलग-अलग कैडर में नियुक्त किया जाता है, ताकि किसी एक राज्य में ज्यादा टॉप रैंक वाले उम्मीदवार न पहुंच जाए और पूरे देश में अधिकारियों का संतुलित वितरण हो सके.