कर्नल या फिर ब्रिगेडियर आर्मी में कौन-सा पद है बड़ा? आज तक ये बात नहीं जानते होंगे आप
ऑफिसर लेवल एंट्री के जरिए चुने गए उम्मीदवारों को ट्रेनिंग पूरी करने के बाद लेफ्टिनेंट पद पर कमीशन मिलता है. यही ऑफिसर रैंक की शुरुआत होती है. इस पद पर लेवल 10 के अनुसार 56,100 से 1,77,500 तक मासिक सैलरी मिलती है.
वहीं लेफ्टिनेंट के तौर पर करीब 2 साल की सेवा देने के बाद अधिकारी को प्रमोशन देकर कैप्टन बनाया जाता है. इसके लिए कोई अलग परीक्षा नहीं होती. प्रमोशन रिकॉर्ड, ट्रेनिंग और अनुशासन के आधार पर दिया जाता है. इस रैंक पर सैलरी बढ़कर 61,300 से 1,93,900 रुपये तक हो जाती है.
वहीं कैप्टन के रूप में लगभग 6 साल की सेवा पूरी करने के बाद अधिकारी को मेजर के पद पर प्रमोशन मिलता है. इस रैंक पर जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. मेजर की मंथली सैलरी 69,400 से 2,07,200 रुपये तक होती है.
करीब 13 साल की कमीशन सर्विस पूरी होने पर अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल बनता है. इस पद पर प्रतिमाह सैलरी 1,21,200 से 2,12,400 तक मिलती है.
वहीं लेफ्टिनेंट कर्नल के बाद प्रमोशन होकर कर्नल की पोस्ट मिलती है. यह एक अहम कमांडिंग रैंक मानी जाती है. कर्नल की सैलरी 1,30,600 से 2,15,900 प्रतिमाह तक होती है.
ब्रिगेडियर की रैंक कर्नल से ऊपर होती है. इस पद पर प्रमोशन के लिए विशेष चयन बोर्ड का गठन होता है. जिसमें सीनियर अधिकारी शामिल रहते हैं. ब्रिगेडियर को वर्तमान में 1,39,600 से 2,17,600 रुपये तक मंथली सैलरी मिलती है.
वहीं ब्रिगेडियर के बाद मेजर जनरल और फिर लेफ्टिनेंट जनरल की रैंक आती है. यह एचएजी स्केल के अधिकारी होते हैं. मेजर जनरल के अधीन हजारों सैनिकों की यूनिट काम करती है, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल कमान स्टाफ ट्रेनिंग और प्लानिंग जैसे शीर्ष पदों पर होते हैं.
लेफ्टिनेंट जनरल HAG के बाद VCOAS, आर्मी कमांडर या लेफ्टिनेंट जनरल NFSG का पद आता है. इस रैंक पर 2,25,000 निश्चित महीने की सैलरी मिलती है
वहीं भारतीय सेना का सबसे ऊंचा सक्रिय पद चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ यानी थल सेना प्रमुख का होता है. यह चार स्टार जनरल रैंक है, जिनके हाथों में पूरी सेना की कमान होती है. इस पद पर 2,50,000 रुपये निश्चित महीने की सैलरी मिलती है. इसके अलावा मिलिट्री सर्विस पे और अन्य भत्ते भी दिए जाते हैं.