पहले अंडा या मुर्गी? झगड़ा निपटा नहीं, लेकिन कुदरत को चैलेंज करता जन्मा चूजा!
इसके बाद प्लास्टिक के कप में रखा ब्लास्टोडर्म लगातार बढ़ने लगा. एक हफ्ते में ब्लास्टोडर्म पहले से काफी बड़ा हो गया था.
जापानी छात्रों ने सबसे पहले पलास्टिक के पन्नियों को कुछ इस तरह से मोड़ कर उसे प्लास्टिक के ही एक अगल कप में रख दिया.
21 दिनों के बाद विश्व में ऐसा पहली बार हुआ कि एक चूजे का जन्म बिना एग शेल के संभव हो सका.
जापान के हाईस्कूल के छात्रों के एक समूह ने एक ऐसी खोज की है जिसे जान कर आप हैरान रह जाएंगे. स्कूली छात्रों के बायोलॉजिकल तकनीक की मदद से एक चूजा विश्व में पहली बार बिना अंडे के जन्म लेने में सक्षम हो सका. चीबा के हाईस्कूल के छात्रों के समूह की तरफ से किया गया ये कारनामा अपने आप में अनूठा है... किस तरह से बिना अंडे के इस चूजे ने जन्म लिया आइए जाने...
तीन दिन के बाद प्लास्टिक के कप में रखे भ्रूंण के हृदय में हलचल होने लगी. पांच दिन के बाद भ्रूंण ने अपना आकार ले लिया.
इसके बाद उस प्लास्टिक के कप को इंक्यूबेशन प्रॉसेस के लिए रख दिया गया.
उसके बाद एक मुर्गी के अंडे को फोड़ कर के उसी प्लास्टिक के कप में रख दिया जिसमें प्लास्टिक की पन्नियों को मोड़ कर डाला गया था. इसी कप के अंदर चूजे को हैच किया जाएगा.