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'किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार....' के गायक मुकेश की बड़ी बातें

एबीपी न्यूज़   |  22 Jul 2016 10:56 AM (IST)
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सुरों के सरताज को मिले थे कई अवार्ड: मुकेश फिल्मफेयर पुरस्कार पाने वाले पहले पुरुष गायक थे. उन्हें फिल्म 'अनाड़ी' से 'सब कुछ सीखा हमने', 1970 में फिल्म 'पहचान' से 'सबसे बड़ा नादान वही है', 1972 में 'बेइमान' से 'जय बोलो बेईमान की जय बोलो' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया. फिल्म 1974 में 'रजनीगंधा' से 'कई बार यूं भी देखा है' के लिए नेशनल पुरस्कार, 1976 में 'कभी कभी' से 'कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया है.

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कभी हीरो भी बने थे मुकेश: मुकेश को बचपन से ही अभिनय का शौक था, जिसके चलते वह फिल्म 'माशूका' और 'अनुराग' में बतौर हीरो भी नजर आए लेकिन दोनों फिल्में फ्लॉप हो गईं और उन्हें आर्थिक तंगी से जूझना पड़ा. सुरों के सरताज को मिले थे कई अवार्ड

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दोनों ने एक साथ जीता फिल्मफेयर अवार्ड: साल 1959 में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'अनाड़ी' ने राज कपूर को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया। लेकिन कम ही लोगों को पता है कि राज कपूर के जिगरी यार मुकेश को भी अनाड़ी फिल्म के 'सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी' गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था.

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अभिनेता दिलीप कुमार जैसे दिग्गजों की बने आवाज़: एक दौर में मुकेश की आवाज में सबसे ज्यादा गीत अभिनेता दिलीप कुमार पर फिल्माए गए. दिलीप कुमार की फिल्म मधुमती के गाने अब भी लोगों के दिलों दिमाग पर छाए हुए हैं.

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लाजवाब हैं मुकेश की पीढ़ियां: मुकेश के बेटे नितिन ने अपने नाम के साथ पिता का नाम जोड़ लिया था. लोग उन्हें नितिन मुकेश के नाम से जानते हैं. अपने पिता की तरह ही उन्होने कई फिल्मो में अपनी आवाज़ दी. दुनियाभर में प्रोग्राम भी किए. नितिन के बेटे यानी मुकेश के पोते नील के नाम में पिता और दादा, दानों के नाम जुड़े हैं. नील नितिन मुकेश गाना नही गाते लेकिन वो बॉलिवुड के चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं.

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जन्मदिन के दिन ही भाग कर की शादी: मुकेश को गुजराती लड़की सरला पसंद आ गई थी. सरला और मुकेश का परिवार इस शादी के खिलाफ था. तमाम बंदिशों के बाद भी मुकेश ने अपने जन्मदिन के दिन 22 जुनाई 1946 को सरला के साथ भाग के शादी कर ली. मुकेश के एक बेटे और दो बेटियां हैं. बेटे का नाम नितिन और बेटियां रीटा व नलिनी रखा गया.

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आखिरी सांस तक साथ चला था संगीत: मुकेश का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुआ. उस समय वह गा रहे थे- 'एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल'.

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गीतों को सुहाना सफर: 200 से ज्यादा फिल्मों में 40 साल लंबे सुहाने सफर में मुकेश की आवाज़ ने ना जाने कितने ही दिलों को छुआ है. आज भी उनके गीतों की खासियत ये है कि वो हर किसी के असल जिंदगी से सरोकार रखते हैं. 'दोस्त-दोस्त ना रहा', 'जीना यहां मरना यहां', 'कहता है जोकर', 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई', 'आवारा हूं', 'मेरा जूता है जापानी' जैसे खूबसूरत गीतों को शायद ही कोई भूल पाया हो.

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बेहद खास थी राज कपूर और मुकेश की दोस्ती: 50 के दशक में मुकेश को शोमैन 'राज कपूर की आवाज' कहा जाता था. राज कपूर और मुकेश में काफी अच्छी दोस्ती थी। उनकी दोस्ती स्टूडियो तक ही नहीं थी। मुश्किल दौर में राज कपूर और मुकेश हमेशा एक-दूसरे की मदद को तैयार रहते थे। राज कपूर की फिल्में और मुकेश के गानों का अनोखा बंधन लोगों को आज भी अपनी तरफ आकर्षित करता है.

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सुरीली आवाज़ और सुरों के सरताज मुकेश की आवाज़ की दीवानगी आज भी कम नही हुई है. दिल्ली के रहने वाले मुकेश का जन्म 22 जुलाई, 1923 को हुआ था. मुकेश के पिता जोरावर चंद्र माथुर पेशे से इंजीनियर थे. मुकेश उनके 10 बच्चों में छठे नंबर पर थे. उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई कर पीडब्लूडी में नौकरी शुरू की थी. लेकिन उनकी किस्मत ने उन्हे मायानगरी मुंबई पहुंचा दिया. मुकेश को कुंदल लाल सहगल के गाने खास तौर से पसंद थे. अपने साथियों के बीच वो सहगल के गाने गाया करते थे. मुकेश ने अपना सफर 1941 में शुरू हुआ. फिल्म 'निर्दोष' में मुकेश ने अदाकारी करने के साथ-साथ गाने भी खुद गाए. इसके अलावा, उन्होंने 'माशूका', 'आह', 'अनुराग' और 'दुल्हन' में भी बतौर अभिनेता काम किया. मुकेश ने अपने करियर में सबसे पहला गाना 'दिल ही बुझा हुआ हो तो' गाया था.

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