Car Engine Capacity: कार के इंजन की कितनी होती है कैपेसिटी, आखिर यह कितने किलोमीटर तक चल सकता है?

गर्मी का मौसम आते ही लोग ट्रेन और बस की भीड़ से बचना पसंद करते हैं. खासकर जब तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तब परिवार के साथ सफर के लिए कार सबसे आरामदायक विकल्प लगती है. एसी की ठंडी हवा और अपनी मर्जी से रुकने की सुविधा लोगों को लंबी दूरी के लिए कार चुनने पर मजबूर कर देती है. लेकिन जब भी कोई लंबा सफर प्लान करता है, उसके मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर कार का इंजन लगातार कितनी दूर तक चल सकता है? क्या 500 किलोमीटर, 1000 किलोमीटर या उससे भी ज्यादा? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कार के इंजन की असली क्षमता क्या होती है.
असल में किसी भी कार के इंजन के लिए ऐसा कोई तय नियम नहीं है कि वह सिर्फ एक निश्चित किलोमीटर तक ही चल सकता है. आमतौर पर आज की आधुनिक पेट्रोल कारों के इंजन 2 लाख से 3 लाख किलोमीटर तक आराम से चल सकते हैं, जबकि अच्छी देखभाल मिलने पर कई डीजल इंजन 4 लाख से 5 लाख किलोमीटर तक भी चल जाते हैं. हालांकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि कार की सर्विस समय पर हुई है या नहीं, इंजन ऑयल सही समय पर बदला गया है या नहीं और गाड़ी को किस तरह चलाया गया है.
साथ ही ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इंजन की सही देखभाल की जाए तो वह 15 से 20 साल या उससे भी ज्यादा समय तक बिना किसी बड़ी परेशानी के काम कर सकता है. यही वजह है कि कई पुरानी कारें आज भी लाखों किलोमीटर चलने के बाद सड़कों पर दौड़ती नजर आती हैं. इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि इंजन की उम्र इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि उसकी देखभाल कैसी की गई है, न कि सिर्फ उसकी उम्र कितनी है.
अगर बात लगातार चलाने की करें तो आज की आधुनिक कारें कई घंटों तक बिना किसी परेशानी के चल सकती हैं. आमतौर पर एक कार 4 से 8 घंटे तक लगातार चल सकती है, जिसके बाद सबसे बड़ी जरूरत ईंधन भरवाने की होती है. यानी कई मामलों में कार से ज्यादा चालक को आराम की जरूरत पड़ती है. कुछ ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इंजन, कूलिंग सिस्टम और इंजन ऑयल सही हालत में हों तो कार लंबी दूरी तक बिना रुके चल सकती है.
तकनीकी रूप से देखा जाए तो कार को इंसानों की तरह आराम की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन लंबी यात्रा के दौरान हर 2 से 3 घंटे में कुछ मिनट रुकना अच्छा माना जाता है. इससे ड्राइवर को आराम मिल जाता है और साथ ही टायर, ब्रेक और इंजन की स्थिति पर भी नजर रखी जा सकती है. साथ ही विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि लंबे सफर में छोटे-छोटे ब्रेक लेना सुरक्षित ड्राइविंग के लिए जरूरी है.
इसके अलावा कई लोगों के मन में ये सवाल आता है कि क्या गर्मी का असर इंजन पर भी पड़ता है. तो इस सवाल का जवाब है हां. गर्मी का असर कार के इंजन पर पड़ सकता है. जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा होता है, तब इंजन को ठंडा रखने वाले सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. अगर कूलेंट कम हो, रेडिएटर में दिक्कत हो या इंजन की सर्विस समय पर न हुई हो, तो इंजन ज्यादा गर्म हो सकता है. हालांकि नई कारों में बेहतर कूलिंग सिस्टम दिए जाते हैं, फिर भी ऑटो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों में लंबी यात्रा से पहले कूलेंट और इंजन ऑयल की जांच जरूर कर लेनी चाहिए.
कई लोग सोचते हैं कि इंजन खराब होना उसकी किस्मत में लिखा होता है, लेकिन सच्चाई कुछ और है. आपको बता दें कि इंजन की उम्र बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान समय पर सर्विस का होता है. साथ ही विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल कारों की सर्विस आमतौर पर करीब 7,500 से 10,000 किलोमीटर के बीच करानी चाहिए, जबकि इंजन ऑयल भी तय समय पर बदलना जरूरी होता है. सही देखभाल इंजन को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखती है.
कई लोगों को लगता है कि ज्यादा दूरी चलने के बाद इंजन बेकार हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं होता है. आज भी भारत में ऐसी हजारों कारें हैं जो 1 लाख, 2 लाख और यहां तक कि 3 लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी हैं और फिर भी सड़क पर दौड़ रही हैं. असली मायने किलोमीटर नहीं, बल्कि कार की हालत और उसकी समय-समय पर मेंटेनेंस कि होती है.