EV खरीदने से पहले Range नहीं, ये 5 चीजें जरूर Check करें

इन दिनों जब भी कोई नया खरीददार नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की सोचता है तो उसके दिमाग में गाड़ी का रेंज कितना होगा यही दिमाग में आता है. हालांकि, सच तो यह है कि सिर्फ लंबी रेंज देख ईवी लेने से फैसला सही नहीं हो जाता. अगर आप सच में एक बेहतरीन ड्राइविंग एक्सपीरियंस और अपनी मेहनत की कमाई का सही इस्तेमाल चाहते हैं तो शोरूम जाने से पहले रेंज के अलावा इन 5 बेहद जरूरी बातों पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है.
आपको बता दें कि, सबसे पहली और काम की बात है आपके घर का चार्जिंग सेटअप और पर्सनल पार्किंग स्पेस. ईवी का असली मजा तभी है जब आप रात में गाड़ी प्लग-इन करो और सुबह फुल चार्ज मिले. अगर आपके पास अपनी पक्की पार्किंग नहीं है या सोसाइटी वाले चार्जर लगाने का झंझट करते हैं तो रोज बाहर के पब्लिक चार्जर्स के चक्कर काटना आपको काफी थकाऊ और परेशान करने वाला लग सकता है.
जबकि दूसरी जरूरी चीज जो आपको देखनी चाहिए वह है गाड़ी की चार्जिंग स्पीड और सपोर्टेड चार्जिंग टाइप. हर ईवी एक ही स्पीड से बिजली नहीं खींचती. कुछ कारें फास्ट डीसी चार्जिंग को फटाफट सपोर्ट करती हैं जबकि कुछ में ज्यादा टाइम लगता है. आपको यह पता होना चाहिए कि नॉर्मल 15 एम्पीयर के सॉकेट पर गाड़ी कितनी देर में चार्ज होती है और फास्ट चार्जर पर 15 मिनट में कितना बैकअप देती है.
वहीं, तीसरा सबसे बड़ा पॉइंट बैटरी पैक्स की वारंटी, उसकी केमिस्ट्री और रिप्लेसमेंट कॉस्ट से जुड़ा है. पूरी कार की कीमत का आधा हिस्सा तो उसकी बैटरी ही होती है इसलिए कंपनी की वारंटी टर्म्स को ध्यान से समझें. ज्यादातर ब्रांड्स 8 साल की वारंटी तो दे देते हैं लेकिन आपको यह भी देखना होगा कि क्षमता कम होने पर कंपनी के रिप्लेसमेंट के नियम क्या कहते हैं.
बता दें कि, चौथी चीज जो हर ईवी बायर्स को चेक करनी चाहिए वह है उनके इलाके और रेगुलर रूट्स का चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर. आपके ऑफिस के रास्ते, नजदीकी मॉल और वीकेंड गेटवे वाले रास्तों पर फास्ट चार्जिंग स्टेशंस का सही नेटवर्क है या नहीं.
पांचवीं और बेहद खास बात है गाड़ी का थर्मल मैनेजमेंट और सॉफ्टवेयर अपडेट सिस्टम. भारत की भीषण गर्मी में बैटरी का टेम्परेचर कंट्रोल में रहना बहुत जरूरी है. इसलिए हमेशा लिक्विड-कूल्ड बैटरी वाली कार ही चुनें. इसके साथ ही कार में ओवर-द-एयर यानी ओटीए सॉफ्टवेयर अपडेट्स मिलने चाहिए ताकि गाड़ी में आने वाले छोटे-मोटे बग्स और कमियां बिना सर्विस सेंटर का चक्कर काटे घर बैठे ही ठीक हो जाएं.
जबकि इसके अलावा गाड़ी का रीसेल वैल्यू और इंश्योरेंस कॉस्ट भी ऐसा पहलू है जिस पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते. पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों के मुकाबले ईवी की सेकंड हैंड मार्केट अभी उतनी मैच्योर नहीं हुई है. इसलिए रीसेल वैल्यू थोड़ी कम मिल सकती है. साथ ही बैटरी पैक महंगा होने की वजह से ईवी का इंश्योरेंस प्रीमियम थोड़ा ज्यादा होता है जो हर साल आपकी जेब पर असर डालता है.
जानकारी दें दे कि, ईवी का आफ्टर-सेल्स सर्विस नेटवर्क और स्पेयर पार्ट्स की आसानी से उपलब्धता भी काफी मायने रखती है. कई नए ब्रांड्स गाड़ियां तो बहुत आकर्षक बेच रहे हैं लेकिन उनके सर्विस सेंटर हर शहर में मौजूद नहीं हैं. अगर गाड़ी में कोई इलेक्ट्रिकल या सॉफ्टवेयर खराबी आ जाए तो आपके शहर में एक्सपर्ट मैकेनिक और कंपनी का ट्रेंड स्टाफ होना बहुत जरूरी है, वरना गाड़ी हफ्तों खड़ी रह जाएगी.
बता दें कि, कम रनिंग कॉस्ट और शांत ड्राइविंग एक्सपीरियंस की वजह से इलेक्ट्रिक कार चुनना एक बेहतरीन फैसला है. लेकिन आप हर पहलू को अच्छे से परख लें. सिर्फ कागजी दावों और कंपनी द्वारा बताए गए रेंज के पीछे भागने के बजाय इन व्यावहारिक बातों को समझकर ही अपना बजट बनाएं. पूरी जानकारी के साथ ली गई ईवी आपके सालों-साल के सफर को सचमुच एकदम मजेदार और किफायती बनाए रखेगी.