Yoga Day 2026: योग से रोग ही नहीं, ग्रह दोष भी करें दूर, जानें किस ग्रह के लिए कौन सा योगासन

योग दिवस 2026
2026 में 12वां अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा. ज्योतिष के अनुसार कुंडली में जब ग्रह खराब स्थिति में हो तो सिर्फ आर्थिक ही नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी परेशानी बन जाते हैं. ऐसे में योग से ग्रहों की पीड़ा से बचा जा सकता है.
सूर्य का संबंध ऊर्जा, आत्मबल, लीडरशिप से है. कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो इन क्षेत्रों के अलावा आंखों और हृदय के संतुलन के लिए सूर्य नमस्कार, भस्त्रिका प्राणायाम और अनुलोम-विलोम को उपयोगी माना जाता है.
चंद्रमा का संबंध मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन से है. इसकी कमजोरी को बेचैनी मूड में उतार-चढ़ाव और तनाव से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में मन को शांत रखने वाले योगाभ्यास ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं. अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम और ध्यान करना चाहिए.
मंगल कुंडली में अशुभ हो तो व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, ऊर्जा की कमी होने लगती है. इसे संतुलित करने के लिए पद्मासन, तितली आसन, मयूरासन और शीतली प्राणायाम करने की सलाह दी जाती है.
बुध को बुद्धि, संवाद और मानसिक स्पष्टता का ग्रह माना जाता है. इसकी कमजोरी को निर्णय लेने में असमंजस, एकाग्रता में कमी और मानसिक थकान से जोड़ा जाता है. इस ग्रह की अशुभता से बचने के लिए भ्रामरी, अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए.
बृहस्पति ज्ञान, विस्तार और संतुलन का प्रतीक है. कपालभाति, सर्वांगासन और सूर्य नमस्कार गुरु को नियंत्रित करने के लिए इसके लिए उपयोगी माना गया है.
शुक्र कुंडली में दूषित हो तो रिश्तों में असंतुलन, जीवनशैली की अव्यवस्था और शारीरिक थकान से जोड़कर देखा जाता है. योग में धनुरासन, हलासन, मूलबंध और जानुशिरासन जैसे अभ्यास लाभकारी माने गए हैं.
शनि कुंडली में कमजोर हो तो शरीर में जकड़न,मानसिक तनाव, थकान और तमाम असुविधाओं होती हैं, ऐसे में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम इसमें सहायक माने गए हैं. इससे शनि की अशुभता से बचा जा सकता है.
राहु केतु जब कुंडली में बुरी स्थिति में हो तो जीवन के अप्रत्याशित बदलावों से जोड़कर इसे देखा जाता है. ध्यान, कपालभाति, भ्रामरी और अनुलोम-विलोम जैसे अभ्यास मन को केंद्रित करने में सहायक माने जाते हैं.