Christmas 2025: इंग्लैंड में क्रिसमस पर बच्चों को क्यों केक की जगह दिया जाता है कोयला ?
25 दिसंबर यानी क्रिसमस का इंतजार बच्चों से लेकर बड़ों तक को बेसब्री से इंतजार रहता है,क्योंकि ये फेस्टिवल उत्साह, उम्मीद और खुशियों का प्रतीक है. खासकर बच्चे इस दिन सेंटा के गिफ्ट का इंतजार करते हैं.
क्रिसमस पर जहां बच्चों को सेंटा चॉकलेट, केक और कई सारे अच्छे गिफ्ट देते हैं तो वहीं इंग्लैंड में एक अनोखा रिवाज निभाया जाता है. यहां क्रिसमस पर सेंटा शरारती बच्चों मिठाई और गिफ्ट्स की जगह कोयला देते हैं.
दरअसल कोयला देने के पीछे उद्देश्य बच्चों को नैतिक सबक देना और भविष्य में बेहतर व्यवहार के लिए प्रेरित करना है.
सेंट निकोलस चौथी शताब्दी के एक यूनानी बिशप थे, जो अपनी उदारता के लिए जाने जाते थे, सेंट निक, जिन्हें हम सांता क्लॉज़ के नाम से भी जानते हैं, अच्छे बच्चों को छोटे-छोटे उपहार — जैसे फल, ड्रायफ्रूट्स या सिक्के देते थे, जिन्हें अक्सर जूतों या स्टॉकिंग्स में रखा जाता था.
वहीं एक दूसरी मान्यता ये है कि 19वीं सदी में, कोयला घरों में इस्तेमाल होने वाला एक आम ईंधन था, खासकर उन जगहों पर जहाँ चिमनी या स्टोव से गर्मी मिलती थी. चूंकि सांता क्लॉज़ उस दौर में चिमनी से नीचे उतर रहे होते थे, तो शरारती बच्चों के लिए कोयला आसानी से उपलब्ध, सस्ता और साधारण उपहार होता था. इसलिए ये परंपरा आज भी निभाई जाती है.