Tilak: माथे पर U-आकार का तिलक क्यों लगाया जाता है ? क्या है इसका महत्व
U आकार का तिलक केवल एक धार्मिक चिन्ह नहीं है, बल्कि यह भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है. ये तिलक अधिकतर विष्णु जी और उनके अवतारों की पूजा करने वाले वैष्णव संप्रदाय के लोग लगाते हैं.
U आकार के तिलक को ऊर्ध्व पुंड्र तिलक कहा जाता है. पद्म पुराण में इसका उल्लेख मिलता है- ऊर्ध्वपुण्ड्रं धारयेद्यस्तु विष्णोर्भक्तो जितेन्द्रियः। स विष्णोः परमं स्थानं प्राप्नोति नात्र संशयः॥. अर्थात जो भक्त इंद्रियों को वश में रखकर ऊर्ध्व पुंड्र धारण करता है, वह निश्चित रूप से भगवान विष्णु के परम धाम को प्राप्त करता है.
U आकार की दो रेखाएँ भगवान विष्णु के चरणों का प्रतीक मानी जाती हैं और बीच की रेखा माता लक्ष्मी का प्रतीक होती है. अर्थात जहां श्रीहरि होते हैं वहां माता लक्ष्मी जरुर विराजमान होती हैं.
अलग-अलग वैष्णव संप्रदायों में U आकार का तिलक थोड़ा अलग दिखता है. जैसे श्रीवैष्णव (रामानुज) संप्रदाय को मानने वाले सफेद चंदन से U आकार और बीच में लाल या पीले रंग की रेखा बनाते हैं.
गौड़ीय वैष्णव (इस्कॉन) वाले गोपी चंदन से लंबी U आकृति बनाते हैं जो नाक की जड़ तक जाती है और नीचे तुलसी पत्र का चिन्ह् होता है.
माध्व संप्रदाय वाले दो सीधी रेखाएं और बीच में काले चंदन(काजल या गंध) से वायुपत्र हनुमान का प्रतीक चिन्ह् बनाते हैं. वहीं निम्बार्क संप्रदाय दो खड़ी रेखाओं के बीच एक छोटा गोल बिंदु बनाते हैं जो राधा-कृष्म के मिलन को दर्शाता है.
तिलक आज्ञा चक्र (माथे के मध्य भाग) पर लगाया जाता है. योग शास्त्र के अनुसार यह स्थान ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां तिलक लगाने से मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ती है.