Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष में शिव के साथ माता पार्वती की पूजा क्यों जरूरी मानी जाती है?

सोम प्रदोष व्रत 2026
पुराणों के अनुसार प्रदोष व्रत की पूजा में शिव को अकेले नहीं बल्कि उमापति के रूप में पूजा जाता है. शिव और माता पार्वती एकता का प्रतीक हैं. परिवार की सुख शांति के लिए शिव आराधना में माता पार्वती का स्मरण और पूजन महत्व रखता है.
स्कंद पुराण के प्रदोष माहात्म्य में पूजा-विधान के दौरान भगवान शिव का ध्यान उमापतिम् कहकर कराया गया है. इसका एक श्लोक भी मिलता है - नवशक्तिमये रम्ये ध्यायेद्देवमुमापतिम्। चन्द्रकोटिप्रतीकाशं त्रिनेत्रं चन्द्रशेखरम्॥ इसका अर्थ है साधक को प्रदोष व्रत के दिन उमापति भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए, जो करोड़ों चंद्रमाओं के समान प्रकाशमान, त्रिनेत्रधारी और चंद्रशेखर हैं.
शक्ति के बिना शिव अधूरे माने जाते हैं. ऐसे में माता पार्वत के साथ शिव पूजा का अधिक महत्व बताया गया है. प्रदोष व्रत की शाम महादेव को जल तो माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें.
आज सोम प्रदोष व्रत में शिव-पार्वती की पूजा का समय शाम 7.05 मिनट से शुरू होकर रात 9.14 मिनट तक रहेगा.
सोम प्रदोष व्रत की शाम शिवलिंग और माता पार्वती की मूर्ति पर मौली को 7 बार लपेटे, गठबंधन की तरह. फिर सुहाग सामग्री देवी को चढ़ाएं. भोग लगाएं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.