Som Pradosh Vrat Paran Time: प्रदोष व्रत पारण में न करें जल्दबाजी, सुबह 9.23 तक खोल सकेंगे व्रत
16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत पर भक्त प्रदोष काल में पूजा-पाठ करते हैं. शिवालय जाकर जलाभिषेक आदि कए जाते हैं. पूरे दिन व्रत रखने के बाद प्रदोष काल के बाद या फिर अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है.
किसी भी व्रत के बाद पारण (व्रत खोलना) की विधि पूजा का अंतिम और महत्वपूर्ण भाग होता है. बात करें अगर प्रदोष व्रत की तो यह व्रत केवल भूखा रहना मात्र नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव को समर्पित अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत है.
अक्सर लोग पूजा-पाठ के बाद सबसे पहले व्रत खोलने की तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन प्रदोष व्रत के पारण में भक्तों को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि धैर्यपूर्वक सही मुहूर्त में ही व्रत का पारण करें. आमतौर पर अधिकतर पर्व में व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाता है.
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शाम में प्रदोष काल में पूजा की जाती है.प्रदोष काल में पूजा का समय शाम 6.30 से रात 8.54 तक है. कई लोग पूजा-पाठ के बाद फलाहार या सात्विक भोजन कर व्रत का पारण करते है, तो वहीं कुछ अगले दिन भी पारण करते हैं.
पारण के लिए जल्दबाजी करने से पूजा का अधूरा फल प्राप्त होता है. इसलिए धैर्य और श्रद्धापूर्वक सही मुहूर्त में पारण करें या फिर सुबह उठकर सबसे पहले स्नानादि और पूजा पाठ करें, फिर व्रत का पारण करें.
यदि आप अगले दिन प्रदोष व्रत का पारण कर रहे हैं तो 17 मार्च 2026 सुबह 09 बजकर 23 मिनट तक का समय रहेगा. व्रतधारी इस समय तक प्रदोष व्रत का पारण कर सकते हैं. वहीं 16 मार्च को शाम में पूजा के बाद भी पारण किया जा सकता है.
लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि, सुबह पारण करने से पूर्व स्नान करें, शिवजी की पूजा करें, जरूरतमंद में दान करें और फिर प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलें. पारण के दिन भी सात्विक आहार ग्रहण करें.