Shani: शनि कुंडली के सप्तम भाव में बैठ जाएं तो क्या अनर्थ करते हैं?
शनि का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा असर डालता है, खासकर कुंडली के सातवें भाव में शनि हो तो ये अच्छा नहीं माना जाता है.
सातवें भाव में शनि का होना संपत्ति, आयु, व्यापार और व्यक्ति की भावनाओं को प्रभावित करता है.
कुंडली के सप्तम यानी सातवें भाव में शनि ग्रह की मौजूदगी, ज्योतिषीय गणना के मुताबिक वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं मानी जाती है. दांपत्य जीवन में उथल-पुथल मच जाती है. व्यापार में नुकसान होता है.
शनि का सातवें भाव में गोचर करने से तलाक तक की नौबत आ जाती है. पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति स्नेह की कमी के कारण जल्द ही अलग हो सकते हैं
शनि के 7वें भाव में होने से व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचती है. विवाह में भी विलंब होता है. जिन लोगों की शादी हो चुकी है उनका सुसराल पक्ष से रिश्ता अच्छा नहीं रहता.
सप्तम भाव में शनि यदि नीच राशि में हो, तो व्यक्ति को आर्थिक समस्याएंपरेशान करती हैं. शादी के बाद व्यक्ति का पारिवारिक जीवन अच्छा नहीं गुजरता.