Shadi Ke Saat Phere: शादी में सात फेरों का क्या अर्थ हैं, सनातन धर्म में इसका क्या महत्व है
वैदिक और पौराणिक मान्यताओं में 7 अंक को शुभ माना गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए विवाह के दौरान सात फेरे लेने की मान्यता है.
कहते हैं कि मनुष्य सात जन्म लेता है, इसलिए वर-वधु को सात जन्मों का साथी कहा जाता है. शादी के समय सात फेरों में दुल्हा-दुल्हन एक दूसरे के साथ सुखी वैवाहिक जीवन जीने के लिए एक दूसरे को वचन देते हैं.
शादी में लिए जाने वाले सात फेरों का अर्थ सप्तपदी से माना गया है. अग्नि को साक्षी मानकर दूल्हा दुल्हन सात फेरे लेते हैं. मान्यता है कि इससे सात जन्मों का बंधन जुड़ जाता है. पति-पत्नी सात जन्मों तक तन-मन और आत्मा से रिश्ता निभाने का वादा करते हैं.
मनुष्य के शरीर में भी ऊर्जा और शक्ति के सात केंद्र स्थित होते है. शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन सात फेरे लेकर अपनी ऊर्जा और शक्ति एक-दूसरे को समर्पित करने का वचन देते हैं.
पहले वनच में कन्या वर से कहती है तीर्थ यात्रा में आप मुझे बायीं तरह स्थान देंगे. दूसरा - आप अपने माता पिता की तरह ही मेरे माता पिता का भी सम्मान करेंगे. तीसरा- हर परिस्थिति में मेरा साथ देंगे. चौथ में वधू वामांग आने की अनुमति लेती हैं.
पांचवा - घर के कार्यों, लेन देन या कोई अन्य धन खर्च में मेरी भी जानकारी होनी चाहिए. छठा- सदा मेरा सम्मान करेंगे, बुरे काम नहीं करेंगे. सातवां - पराई स्त्री को रिश्ते के बीच नहीं आने देंगे.