Ravan-Bali Yudh: रावण और बाली में जब हुआ युद्ध तो किसकी हुई विजय? परिणाम जान हो जाएंगे हैरान
रामायण का अहम पात्र बाली, किष्किंधा का राजा था. बाली सुग्रीव का बड़ा भाई और इंद्र का पुत्र था और बंदरों का रुप था. बाली का वर्णन रामायण के उत्तर काण्ड में आता है. बाली को ब्रह्मा का वरदान प्राप्त था. बालि को उसके पिता इन्द्र से एक स्वर्ण हार प्राप्त हुआ जिसको ब्रह्मा ने मंत्रयुक्त करके यह वरदान दिया था कि इसको पहनकर वह जब भी रणभूमि में अपने दुश्मन का सामना करेगा तो उसके दुश्मन की आधी शक्ति बाली में आ जाएगी. इसी कारण बाली लगभग अजेय था.
बाली ने पराक्रमी रावण को हरा दिया था.लेकिन बाली का वध श्रीराम ने किया. राम ने बाली को पेड़ की आड़ से तीर चलाकर मारा था.
रावण को इस बात का अंहकार था कि उसकी मृत्यु किसी देवता, असुर, राक्षस, किन्नर, गंधर्व, सर्प या गरुड़ आदि से नहीं होगी. बाली की असीम शक्तियों का पता जब रावण को पता चला तो रावण को बाली से ईष्या होने लगी जिसके बाद ही उसने बाली को युद्ध के लिए ललकारा.
इसके बाद ही रावण और बाली के बीच युद्ध हुआ. बाली को मिले वरदान के कारण रावण की आधी शक्ति बाली में आ गई. बाली रावण से ज्यादा शक्तिशाली हो गया और रावण की हार निश्चित हो गई. बाली ने रावण को कारावास में बंद कर दिया और हर रोज उसका अपमान करने लगा.
बाली ने रावण को 6 महीने तक अपनी बगल में दबाकर रखा. बाली ने रावण का वध नहीं किया लेकिन प्रतिदिन उसे लज्जित करता था. हर रोज बाली रावण को अपनी बगल में दबाकर चारों दिशाओं के घुमाता था और सभी के सामने अपमानित करता था. ऐसा बाली ने लगभग 6 महीने तक किया.