अगर आपका बच्चा भी 'मूल' में जन्मा है, तो डरें नहीं, ये बनते हैं राजा!

मूल नक्षत्र में जन्मा बच्चा
अगर बच्चा मूल नक्षत्र में पैदा हुआ है तो डरने की बात नहीं है. ज्योतिष शास्त्र और ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार इसे अशुभ नहीं माना जाता है. चूंकि ये गण्डमूल नक्षत्रों में से एक है इसलिए अगर बच्चा इसमें पैदा हो तो परंपरा के अनुसार ऐसे शिशु के लिए गण्डमूल शांति कराई जाती है, जो जन्म के 27वें दिन पर होती है.
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका के अनुसार मूल में पैदा हुए बच्चे तीव्र बुद्धि वाले, किसी भी बात को बिना समझे नहीं मानते, बल्कि उसकी सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं.चुनौतियों का सामना करने से घबराते नहीं है.
मूल में जन्मा बच्चा कभी संकट में घबराता नहीं, मुश्किल समय में भी धैर्य और हिम्मत बनाए रखते हैं. अपनी बात स्पष्ट रूप से सबके सामने रखते हैं. ज्योतिषाचार्य के अनुसार ऐसे बच्चों में गजब की लीडरशिप क्वालिटी होती है.
मूल नक्षत्र के स्वामी केतु और अधिष्ठाता देवता निर्ऋति हैं, वैदिक ग्रंथों में निर्ऋति का संबंध विनाश, क्षय, रोग, दुर्भाग्य और अधर्म से मुक्ति से जोड़ा गया है.
बच्चे का स्वभाव, भाग्य और भविष्य उसकी संपूर्ण जन्मकुंडली से ही निर्धारित होता है, सिर्फ मूल नक्षत्र को देखकर उसका भविष्य देखना शास्त्रसम्मत नहीं है.