Kajari Teej 2023: 2 सितंबर को कजरी तीज व्रत, जानें स्त्रियां क्या करें, क्या न करें
कजरी तीज व्रत में स्त्रियां सूर्योदय से चंद्रोदय तक निराहार व्रत रखें. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही इस व्रत का पारण नहीं. चांद पूजा के बिना कजरी तीज व्रत का फल नहीं मिलता.
कजरी तीज सुहाग पर्व है, ऐसे में इस दिन सुहागिनें काले या सफेद रंग के वस्त्र, चूड़ियां न पहनें. साथ ही वाद-विवाद से बचें. क्रोध न करें और घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें. मन और वाणी से किसी के लिए अपशब्द का प्रयोग न करें
कजरी तीज को सातुड़ी तीज भी कहा जाता है. इस दिन पूजा में चने की दाल के सत्तू का उपयोग जरुर करें, इसके बिना व्रत-पूजा अधूरी मानी जाती है. पूजा के बाद आटे की सात लोइयां बनाकर उन पर घी, गुड़ रखकर गाय को खिलाएं. इससे शंकर-पार्वती बहुत प्रसन्न होते हैं.
कजरी तीज को सातुड़ी तीज भी कहा जाता है. इस दिन पूजा में चने की दाल के सत्तू का उपयोग जरुर करें, इसके बिना व्रत-पूजा अधूरी मानी जाती है. पूजा के बाद आटे की सात लोइयां बनाकर उन पर घी, गुड़ रखकर गाय को खिलाएं. इससे शंकर-पार्वती बहुत प्रसन्न होते हैं.
तीज व्रत में मेहंदी लगाने की परंपरा है. सुहागिनें इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें. दोपहर में सोएं नहीं. कजरी तीज व्रत का पारण प्रसाद ग्रहण करके ही करें. उसके बाद सात्विक भोजन खाएं.