Islamic Rules: मुसलमान क्यों बैठकर पीते हैं पानी, इसे लेकर क्या कहता है साइंस
दुनियाभर के मुसलमान सुन्नत का पालन करते हैं, जोकि पैगंबर मुहम्मद (Muhammad) की शिक्षाओं और कुरान की व्याख्या पर आधारित मुसलमानों के लिए एक आदर्श जीवनशैली है. पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की सुन्नत में पानी पीने के नियम भी बताए गए हैं.
पानी पीने की सुन्नत: जब प्यास लगे तो बिस्मिल्लाह कहते हुए बैठ जाएं और फिर दाहिने हाथ से पानी पीएं. एक बार में पूरा पानी न पीकर 3 बार में रुक कर पीएं और जब पानी खत्म हो जाए तो अल्हम्दुलिल्लाह पढ़ें.
विज्ञान भी मानता है कि खड़े होकर या चलते-चलते पानी पीने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं. क्योंकि इस समय पानी तेजी से पेट के भीतर जाता है और पांचन तंत्र को प्रभावित करता है. इससे गैस, एसिडिटी जैसी समस्याएं होती हैं और साथ गुर्दों पर भी दबाव पड़ता है.
मुसलमान एक बार में पूरा पानी घूंटघूंट न पीकर 3 बार रुक कर पीते हैं. यह नियम भी विज्ञान से जुड़ा है. कई अध्ययनों से पता चला है कि, बिना रुके एक बार में पानी पीना मांसपेशियों और नसों को नुकसान पहुंचाता है.
इस्लाम में दाहिने हाथ से ही पानी पीने के लिए कहा गया है, क्योंकि पैगम्बर मुहम्मद का पैगाम है कि, बाएं हाथ से कभी मत खाओं और पियो, क्योंकि शैतान बाएं हाथ से खाते-पीते हैं.
हालांकि कुछ स्थिति में खड़े होकर भी पानी पिया जा सकता है. क्योंकि इस्लाम में बैठकर पानी पीना वांछनीय है, लेकिन अनिवार्य नहीं. पैगम्बर मुहम्मद भी कभी-कभी खड़े होकर पानी पीते हैं. कहा जाता है कि उन्हें जमजम का पानी खड़े होकर पीते देखा गया था.
इस्लामिक नियम के अनुसार पानी पीने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहना चाहिए. दरअसल यह अल्लाह की प्रशंसा और उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए किया जाता है, जिन्होंने हमें जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण चीज यानि ‘जल’ दिया, जोकि पृथ्वी का सबसे महत्वपूर्ण पेय है.