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Panchak 2025: क्यों नहीं किए जाते पंचक में शुभ कार्य? जानें पंचक के प्रकार, प्रभाव और करने योग्य उपाय

हर्षिका मिश्रा   |  31 Oct 2025 02:58 AM (IST)
Panchak 2025: क्यों नहीं किए जाते पंचक में शुभ कार्य? जानें पंचक के प्रकार, प्रभाव और करने योग्य उपाय

पंचक के दौरान शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?

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क्यों नहीं किए जाते पंचक में शुभ कार्य: ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पंचक काल को अशुभ और हानिकारक माना गया है. यह वह अवधि होती है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि से होकर गुजरता है. इस दौरान कई राशियों और नक्षत्रों का प्रभाव अशुभ फल देता है. पंचक के समय शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है ताकि जीवन में नकारात्मक प्रभाव न आए.

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कब और कैसे बनता है पंचक: जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तब पंचक काल बनता है. इन पांच नक्षत्रों के कारण इसे “पंचक” कहा जाता है. यह समय लगभग पांच दिनों तक रहता है और इसे अशुभ माना गया है. इस दौरान घर बनाना, यात्रा या वस्तुओं का संग्रह करना वर्जित होता है.

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पंचक के पांच प्रकार: पंचक को पांच भागों में बांटा गया है, रोग पंचक, नृप पंचक, चोर पंचक, मृत्यु पंचक और अग्नि पंचक. रविवार से शुरू होने वाला रोग पंचक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. सोमवार का नृप पंचक सरकारी कार्यों के लिए शुभ, जबकि निजी कार्यों के लिए अशुभ है. शुक्रवार का चोर पंचक आर्थिक नुकसान दे सकता है. शनिवार का मृत्यु पंचक जीवन में संकट लाता है, और मंगलवार का अग्नि पंचक गृह निर्माण जैसे कार्यों के लिए प्रतिकूल माना गया है.

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पंचक में किन नक्षत्रों से हानि: धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है, जबकि शतभिषा में झगड़े की संभावना बढ़ती है. पूर्वाभाद्रपद में सेहत बिगड़ सकती है, उत्तराभाद्रपद आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, और रेवती नक्षत्र में धन हानि के योग रहते हैं. इन नक्षत्रों के दौरान यात्रा, दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान या नया बिस्तर बनवाने से बचना चाहिए.

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पंचक में मृत्यु और सावधानियां: यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके साथ आटे या कुश के पांच पुतले बनाकर उनका भी अंतिम संस्कार किया जाता है. ऐसा न करने पर पंचक दोष लगने की संभावना रहती है. ज्योतिष के अनुसार यह दोष परिवार में पांच अन्य सदस्यों के लिए मृत्यु या संकट का कारण बन सकता है.

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पंचक में करने योग्य शुभ कार्य: पंचक को प्रायः अशुभ माना जाता है, लेकिन कुछ नक्षत्र शुभ कार्यों के लिए अनुकूल होते हैं. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में सर्वार्थसिद्धि योग बनता है. धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्रों में यात्रा या मशीनरी कार्य शुभ होते हैं, जबकि रेवती नक्षत्र में व्यापार, वस्त्र या आभूषण खरीदना लाभदायक रहता है.

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