Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में मांस-मछली और लहसुन-प्याज का त्याग काफी नहीं, इन चीजों से भी करें परहेज
मां दुर्गा की उपासना के लिए नवरात्रि का समय सबसे श्रेष्ठ होता है. 9 दिनों तक चलने वाले नवरात्रि में लोग व्रत रखकर माता रानी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं.
इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हुई है, जिसका समापन 27 मार्च 2026 को हो जाएगा. नवरात्रि के दौरान अधिकतर लोग मांसाहार भोजन और लहसुन-प्याज का पूरी तरह से त्याग करते हैं.
लेकिन जानकारों की मानें तो नवरात्रि में लहसुन-प्याज या मांस-मछली का त्याग काफी नहीं है. व्रत में शुद्धता और सात्विकता बनाए रखने के लिए कुछ अन्य चीजों का परहेज भी जरूरी है, जिससे कि शरीर और मन दोनों पवित्र रहे.
अनाज और दालें- चैत्र नवरात्रि में व्रत के दौरान सभी तरह की अनाज या दालें नही खानी चाहिए. इस समय खासकर मसूर की दाव, चावल, गेहूं से परहेज करें. आप साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, राजगीरा या कट्टू के आटे से बनी चीजें खा सकती हैं.
साधारण नमक- नवरात्रि व्रत के दौरान साधारण नमक (सफेद नमक) से बना भोजन भी नहीं खाना चाहिए. व्रत वाले भोजन में केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करें.
पैकेज्ड और जंक फूड- बाजार से मिलने वाले पैकेज्ड फूड, स्नैक्स, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स या कोल्ड ड्रिंक आदि जैसी चीजें भी व्रत के दौरान नहीं खानी चाहिए. इन चीजों से व्रत की शुद्धता प्रभावित होती है.
खट्टे फल- नवरात्रि में कई लोग फलाहार करते हैं. व्रत में फल खाना गलत नहीं है. लेकिन बहुत अधिक खट्टे फल खाने से बचें. इस समय इमली, नींबू आदि नहीं खाएं. ये चीजें सात्विकता को कम करते हैं.
ज्यादा मसालेदार और तला-भुना भोजन- नवरात्रि व्रत के दौरान बहुत अधिक मसालेदार या तला-भुना भोजन करने से भी बचना चाहिए. व्रत का आध्यात्मिक उद्देश्य सरल और सादा भोजन होना चाहिए. आप इस भोजन के लिए हल्के मसाने और घी का प्रयोग करें.