Bakrid Qurbani: बकरीद में किन जानवरों की कुर्बानी जायज, क्यों गिने जाते है बकरे के दांत

बकरीद 2026
जिहजिज्जा की 10वीं तारीख को भारत में गुरुवार 28 मई 2026 को ईद-अल-अजहा का दिन रहेगा. इसके बकरीद या बकरा ईद भी कहा जाता है. मुस्लिम समुदाय के इस त्योहार पर विशेषरूप से पशुओं की कुर्बानी का महत्व होता है.
बकरीद पर पशु बलि देना इस बात का प्रतीक है कि, एक सच्चे मुसलमान को अल्लाह की रजा के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देनी पड़े तो उसे पीछे नहीं हटना चाहिए.
बकरीद पर पशुओं की कुर्बानी देने के इस्लाम में कुछ खास नियम भी होते हैं. इस दिन खासकर तौर पर बकरा, मेमना, भैंस जैसे पशुओं की कुर्बानी दी जाती है. कुर्बानी से पहले बकरे के दांत गिनना जरूरी होता है. आइए जानते हैं इसका कारण.
बकरीद पर कुर्बानी से पहले बकरे के दांत गिने दाते हैं. अगर बकरे के दो, चार या छह दांत होते हैं तो इसकी कुर्बानी जायज मानी जाती है. अगर किसी बकरे के दांत नहीं है तो इसे नवजात माना जाता है और उसकी कुर्बानी नहीं दी जाती है. वही अगर बकरे के 6 से अधिक दांत होते हैं तो भी उसे बुजुर्ग मानकर कुर्बानी नहीं दी जाती है.
कुर्बानी के बाद पशु मांस (गोश्त) को तीन बराबर हिस्सों मे बांटा जाता है. एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए,दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए और तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है.
इस्लामिक मान्यता अनुसार, बकरीद त्योहार का उद्देश्य केवल गोश्त बांटना या गोश्त खाना नहीं होता, बल्कि इससे मुसलमानों के बीच भाईचारा, आपसी एकता और समाज के गरीब तबके की मदद करने की भावना को बढ़ावा मिलता है.