गहरी बर्फ में 24 घंटे तक मां के शव को कंधे पर ले जाने को मजबूर हुआ सेना का जवान
कुपवाड़ा से करीब बीस किलोमीटर आगे रंगवाड गांव पड़ता है. वहां तक तो अब्बास गाड़ी से जा पाए लेकिन उसके बाद रास्ता बंद होने की वजह से उन्हें पैदल ही मां के शव को कंधे पर उठाकर बढ़ना पड़ा.
जवान का कहना है कि उसे सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली. जबकि सेना और प्रशासन का दावा है कि मदद की कोशिश की गई. सेना के एक अधिकारी ने बताया कि अब्बास के लिए एक हेलीकाप्टर भेजा भी गया था लेकिन तब तक वो पैदल निकल चुका था.
साधना टॉप से तंगधार तक 30 किलोमीटर का ये सफर पूरा करने में अब्बास के 24 घंटे से ज्यादा वक्त लगा. दस घंटे तो सिर्फ साधना टॉप को पार करने में लगे. कई जगह तो बर्फ इतनी ज्यादा था कि गर्दन तक बर्फ में धंस जाती है.
आपको बता दें कि 28 जनवरी को पठानकोट में अब्बास की मां की मौत दिल का दौरा पड़ने से हो गई थी. 29 जनवरी को अब्बास मां का शव लेकर टैक्सी से 450 किलोमीटर दूर कुपवाड़ा पहुंचे. कुपवाड़ा से तंगधार हाईवे से अब्बास को मां का शव लेकर जाना था लेकिन अगले पांच दिनों तक मां के शव के साथ अब्बास कुपवाड़ा में फंसे रहे.
इस हाईवे पर सबसे ऊंची जगह है साधना टॉप 10700 फ़ीट की ऊंचाई पर है. जहां बीस फीट से ज्यादा बर्फ पड़ी थी. रंगवाड गांव साधना टॉप से पहले पड़ता है. जब इस गांव के लोगों को पता लगा कि एक जवान अपनी मां का शव उठाकर ले जाने को मजबूर है तो गांव के लोग भी मदद के लिए साथ आ गए.
बर्फ के तूफान में भारतीय सेना के 20 जवान पिछले हफ्ते ही शहीद हुए हैं. उसके बाद एक और चौकाने वाली खबर कश्मीर घाटी से सामने आ रही है. जहां भारतीय सेना के एक जवान को अपनी मां को शव पांच दिन तक सड़क पर ही रखने को मजबूर होना पड़ा. इतना ही नहीं उसके बाद इस सेना के जवान को मां के शव को 25 फीट बर्फ में चौबीस घंटे तक अपने कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा.
भारी बर्फबारी की वजह से यहां अब्बास के अलावा 50-60 लोग और भी फंसे हुए थे. अब्बास ने हेलिकॉप्टर से शव को गांव पहुंचाने की गुहार भी लगाई. लेकिन जब पांच दिनों तक मदद नहीं मिली तो वो मां का शव लेकर निकल पड़े.