केसर के बाद ये है दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मसाला, जानें कैसे करें वनीला की खेती?

अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर कुछ ऐसा उगाना चाहते हैं जो रातों-रात आपकी किस्मत बदल दे, तो वनीला सबसे बेस्ट ऑप्शन है. केसर के बाद इसे दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मसाला माना जाता है, जिसकी इंटरनेशनल मार्केट में भारी डिमांड है. इसकी लगातार बढ़ती खपत के कारण आजकल भारत के किसान भी इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं.
वनीला की खेती शुरू करने के लिए इसके अनुकूल माहौल, तापमान और मिट्टी की सही समझ होना बहुत जरूरी है. इस कीमती फसल को उगाने के लिए मध्यम तापमान की आवश्यकता होती है, जो लगभग 20 से 30 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए. इसके पौधों के लिए जैविक तत्वों से भरपूर भुरभुरी मिट्टी सबसे परफेक्ट मानी जाती है.
इसकी बुवाई की बात करें तो वनीला एक बेलदार पौधा होता है. जिसे बीज और कटिंग दोनों तरीकों से लगाया जा सकता है. हालांकि ज्यादातर किसान कटिंग लगाना पसंद करते हैं. क्योंकि बीजों से पौधा तैयार होने में समय लगता है. चूंकि यह बेल की तरह बढ़ता है इसलिए इसे सहारा देने के लिए पोल लगाए जाते हैं.
वनीला की बेलों को सही तरीके से मैनेज करना और समय पर पोषक तत्व देना इसकी अच्छी पैदावार के लिए जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार वनीला की बेल की लंबाई को लगभग 150 सेंटीमीटर तक ही रखना चाहिए. पौधों को पोषण देने के लिए समय-समय पर वर्मी कंपोस्ट डालना बेहद फायदेमंद साबित होता है.
पौधों की रोपाई के बाद इसकी फसल को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 3 साल का लंबा समय लग जाता है. इसकी बेल पर करीब 9 से 10 महीने में सुंदर फूल आते हैं. जो बाद में फलियों का आकार ले लेते हैं. जब ये फलियां पक जाती हैं. तो इन्हें सावधानीपूर्वक तोड़कर प्रोसेस किया जाता है.
वनीला की खेती में मिलने वाला मुनाफा इतना तगड़ा है कि यह किसी भी किसान को बहुत कम समय में अमीर बना सकता है. मौजूदा मार्केट ट्रेंड के हिसाब से सूखी वनीला फलियों का भाव करीब 40 हजार से 50 हजार रुपए प्रति किलोग्राम तक आसानी से मिल जाता है जिससे करोड़ों की कमाई होती है.
भारत में अब तक वनीला की मुख्य खेती केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में ही की जा रही थी. लेकिन अब उत्तर भारत के किसान भी शेड हाउस की मदद से इसका सफल ट्रायल कर रहे हैं. सरकार भी औषधीय फसलों को बढ़ावा देने के लिए इस पर शानदार सब्सिडी दे रही है.