सूरज के प्रकोप के सामने भी आसानी से टिक जाएगी फसल, बस करने होंगे ये पांच काम

बढ़ती गर्मी और आसमान से बरसती आग ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. लेकिन सही प्लानिंग के साथ आप अपनी फसल को जलने से बचा सकते हैं. सूरज का प्रकोप जितना भी ज्यादा हो. अगर आप कुछ देसी और मॉडर्न तरीके अपनाते हैं तो पौधों की नमी बरकरार रहेगी.
सबसे पहला और जरूरी काम है सिंचाई का सही वक्त चुनना. क्योंकि दोपहर की तेज धूप में पानी देने से फसल को फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है. हमेशा सुबह जल्दी या फिर सूरज ढलने के बाद ही पानी दें ताकि मिट्टी उसे अच्छी तरह सोख सके. इससे पौधों की जड़ें लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहेंगी.
मिट्टी की नमी को बचाने के लिए मल्चिंग का सहारा ले सकते है. खेत में फसल के अवशेष या सूखे पत्तों की एक परत बिछा देने से जमीन सीधे धूप के संपर्क में नहीं आती. यह लेयर एक ढाल की तरह काम करती है और मिट्टी के तापमान को कंट्रोल में रखती है. जिससे पौधे लू से बचे रहते हैं.
गर्मी के मौसम में केमिकल खाद के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचना चाहिए. क्योंकि ये जमीन को और भी ज्यादा गर्म कर देती हैं. इसकी जगह आप जैविक खाद का इस्तेमाल करें जो पौधों को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ उन्हें अंदर से ठंडा और मजबूत बनाए रखेंगी.
खेतों के चारों तरफ छायादार पेड़ या ऊंची फसलें लगाकर आप एक विंडब्रेकर तैयार कर सकते हैं जो गर्म हवाओं की रफ्तार को कम कर देता है. लू के सीधे अटैक को रोकने के लिए यह एक परमानेंट और सस्ता समाधान है. इसके अलावा छोटे पौधों के लिए नेट हाउस या अस्थायी ग्रीन हाउस का इस्तेमाल करना भी काफी फायदेमंद साबित होता है.
सिंचाई के लिए अब पुराने तरीके छोड़कर ड्रिप इरिगेशन या फव्वारा सिस्टम अपनाया जा सकता है. इससे पानी की एक-एक बूंद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचती है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती. तपती गर्मी में जब पानी की कमी होने लगती है.
आखिर में सबसे जरूरी बात ये है कि अपनी फसल की डेली मॉनिटरिंग करें और किसी भी बीमारी या कीट के लक्षण दिखते ही तुरंत एक्शन लें. धूप से कमजोर पड़े पौधों पर कीटों का हमला जल्दी होता है. इसलिए उनकी इम्यूनिटी बढ़ाना जरूरी है. इन पांच आसान कामों को करके आप अपने खेत को इस झुलसाते मौसम से आसानी से बचा सकते हैं.