कृषि मशीन पर सब्सिडी चाहिए? आवेदन से पहले जान लें कौन-कौन से कागज लगेंगे

खेती-किसानी को आसान और तेज बनाने के लिए आज के दौर में आधुनिक कृषि यंत्र हर किसान के लिए जरूरी हो चुके हैं. जिनमें बात की जाए को रोटावेटर हो, कल्टीवेटर या फिर लेजर लैंड लेवलर इन जैसे यंत्र शामिल है, इन सब पर केन्द्र सरकार और राज्यों की सरकारें 40 से 50 फीसदी तक की सब्सिडी देती है. लेकिन कई बार पूरी जानकारी न होने से आवेदन अटक जाता है.
सब्सिडी पाने के लिए सबसे पहली और जरूरी शर्त होती है आपके पास सही कागजात का होना. कई किसान योजना की तारीख आते ही जल्दबाजी में गलत जानकारी दे देते हैं. तो कई बार फार्म में जानकारी अधूरी छोड़ देते हैं. जिससे नाम पोर्टल से सीधे रिजेक्ट हो जाता है. इसलिए ऑनलाइन अप्लाई करने से पहले अपने सभी डॉक्यूमेंट्स रेडी रखना बहुत जरूरी है.
पहला सबसे अहम दस्तावेज आपका आधार कार्ड है. यह न केवल आपकी पहचान का सबूत है, बल्कि यह आपके एक्टिव मोबाइल नंबर से भी लिंक होना चाहिए. अप्लाई करते समय आपके फोन पर एक ओटीपी आता है. अगर नंबर पुराना है या बंद पड़ा है, तो उसे तुरंत बैंक और आधार सेंटर जाकर अपडेट करवा लें.
इसके अलावा जमीन से जुड़े दस्तावेज, जैसे खतौनी या भूलेख की बिल्कुल नई नकल. इसके साथ ही कुछ राज्यों में पटवारी या लेखपाल द्वारा प्रमाणित रिपोर्ट भी मांग ली जाती है. इससे यह साफ होता है कि आपके पास अपनी खेती योग्य जमीन है और आप किस कैटेगरी के किसान में आते हैं.
वहीं आपका एक्टिव बैंक खाता. ध्यान रखें कि बैंक अकाउंट केवल नेशनल या ग्रामीण बैंक का हो और आधार से पूरी तरह एनपीसीआई लिंक हो. सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी का पैसा डीबीटी यानी सीधे आपके खाते में भेजा जाता है, इसलिए पासबुक की साफ फोटो जरूरी है.
तो कुछ किसानों को जाति प्रमाण पत्र, सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला किसानों को मशीनों पर सामान्य से ज्यादा सब्सिडी देती है. अगर आप इस कोटे का लाभ लेना चाहते हैं. तो आधिकारकि ऑफिस से बना वैलिड जाति प्रमाण पत्र अपलोड करना न भूलें.
इसके अलावा बात की जाए तो आपका पासपोर्ट साइज फोटो और निवास प्रमाण पत्र. कई बार किसान बहुत पुरानी और धुंधली तस्वीर अपलोड कर देते हैं. जिससे फॉर्म निरस्त हो जाता है. अपने राज्य और जिले का पक्का पता साबित करने के लिए वोटर आईडी, राशन कार्ड या बिजली बिल की कॉपी साथ रखनी चाहिए.
और सबसे जरूरी है एक डिक्लेरेशन यानी स्व-घोषणा पत्र. इसमें किसान को यह लिख कर देना होता है कि उसने पिछले तीन से पांच सालों में उस विशेष कृषि यंत्र पर किसी सरकारी योजना से पहले सब्सिडी नहीं ली है. साथ ही यंत्र खरीदने के बाद उसका वैध जीएसटी बिल पोर्टल पर लगाना पड़ता है.
जब सारे कागजात तैयार हो जाएं तो अपने राज्य के कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल जैसे डीबीटी एग्रीकल्चर या ई-कृषि यंत्र पोर्टल पर जाकर तुरंत ऑनलाइन अप्लाई कर दें. याद रखें कुछ योजनाओं में पहले आओ-पहले पाओ तो वहीं कुछ राज्यों में लॉटरी सिस्टम से चयन होता है. इसलिए कागजात दुरुस्त रहेंगे तो सब्सिडी का लाभ बिना रुकावट सीधे खाते में आ जाएगा.