नाइट्रोजन-फास्फेट और सल्फर-पोटाश पर कितनी मिलती है सब्सिडी, जान लें इनकी असली कीमत?

आजकल खेती की लागत आसमान छू रही है. ऐसे में खाद की कीमतों को लेकर किसान हमेशा फिक्रमंद रहते हैं. खरीफ सीजन 2026 के लिए सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए फास्फेटिक और पोटाश (P&K) उर्वरकों पर भारी-भरकम सब्सिडी को मंजूरी दी है.
इस बार सरकार किसानों के लिए करीब 41,534 करोड़ रुपये की सब्सिडी खर्च करने जा रही है. जिससे खेती का बजट न बिगड़े. अगर हम पोषक तत्वों के आधार पर सब्सिडी को समझें. तो नाइट्रोजन पर सरकार प्रति किलो अच्छी खासी मदद दे रही है.
खरीफ 2026 के लिए नाइट्रोजन की सब्सिडी दर 47.02 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है. इसके बिना यूरिया और अन्य खाद की कीमतें इतनी बढ़ जातीं कि आम किसान के लिए उसे खरीदना किसी बड़े निवेश से कम नहीं होता.
फास्फेट की बात करें तो इसकी सब्सिडी रेट 28.72 रुपये प्रति किलो निर्धारित की गई है. फास्फेट पौधों की जड़ों के विकास और मजबूती के लिए बहुत जरूरी होता है. बिना सरकारी मदद के फास्फेट वाली खादों की असली कीमत मार्केट में दो से तीन गुना ज्यादा होती है. लेकिन सब्सिडी की वजह से यह किसानों को किफायती दाम पर मिल जाती है.
पोटाश खाद पर भी सरकार ने तगड़ा सपोर्ट दिया है और इसकी सब्सिडी दर 2.38 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है. पोटाश फसलों की क्वालिटी और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. अगर सरकार यह सब्सिडी न दे. तो इंटरनेशनल मार्केट के उतार-चढ़ाव की वजह से पोटाश की एक बोरी की कीमत हजारों में पहुंच सकती है.
सल्फर को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है और इस पर 1.89 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी मिल रही है. तिलहन और दलहन की फसलों के लिए सल्फर बेहद जरूरी न्यूट्रिएंट है. सरकार का मकसद यह है कि किसान को हर जरूरी पोषक तत्व सस्ते में मिले. ताकि देश में अनाज की पैदावार कम न हो और लागत कंट्रोल में रहे.
खाद की असली कीमत और सब्सिडी के बाद के अंतर की बात करें तो अगर डीएपी (DAP) की एक बोरी बिना सब्सिडी के बाजार में बिके तो इसकी कीमत लगभग 2400 से 3000 रुपये तक हो सकती है. लेकिन सरकार की भारी सब्सिडी के बाद यही बोरी किसानों को महज 1350 रुपये के आसपास मिल जाती है.