किसानों के लिए जैकपॉट बना लाल साग, बार-बार कटाई से बढ़ रही आमदनी

पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर अब किसान भाई कुछ ऐसा ट्राई कर रहे हैं जो कम समय में उनके बटुए को भारी कर दे. मध्य प्रदेश के खेतों में इन दिनों 'लाल साग' यानी लाल चौलाई की जबरदस्त धूम मची है. जो किसानों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है. अप्रैल का महीना इस गर्मी वाली फसल के लिए एकदम परफेक्ट टाइमिंग है.
चिलचिलाती धूप में भी लाल साग की फसल बहुत तेजी से ग्रो करती है और इसकी सबसे मजे की बात तो यह है कि बुवाई के महज 25 से 30 दिनों के भीतर ही यह कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है. जहां दूसरी फसलों में महीनों का लंबा इंतजार करना पड़ता है. वहीं लाल साग की 4 से 5 बार कटाई हो सकती है.
कम लागत और बाजार में साल भर रहने वाली हाई डिमांड ने इसे छोटे और मंझोले किसानों की पहली पसंद बना दिया है. अगर आप भी लाल साग से तगड़ी कमाई करना चाहते हैं. तो सबसे पहले खेत की मिट्टी और ड्रेनेज सिस्टम पर खास ध्यान देना होगा. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके लिए हल्की दोमट मिट्टी बेस्ट रहती है.
खेत की तैयारी के लिए 2-3 बार अच्छी जुताई करके मिट्टी को बिल्कुल भुरभुरा बना लें और इसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना बिल्कुल न भूलें. बुवाई करते समय बीजों को सीधे फेंकने के बजाय उन्हें बालू या मिट्टी में मिलाकर छिड़कें. जिससे वे पूरे खेत में एक समान और सही तरीके से फैल सकें.
क्यारियों के बीच 25 से 30 सेंटीमीटर की दूरी रखने से पौधों को फैलने की पूरी जगह मिलती है. जिससे फसल की क्वालिटी बेहतर होती है. बस एक बात का खास ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो पाए. क्योंकि जलभराव इस नाजुक फसल का सबसे बड़ा दुश्मन है और इससे जड़ें सड़ सकती हैं.
लाल साग सिर्फ किसानों की जेब ही नहीं भरता. बल्कि खाने वालों की सेहत के लिए भी यह एक बेहतरीन सुपरफूड माना जाता है. प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर होने की वजह से डॉक्टर्स भी इसे डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं. यही वजह है कि मार्केट में इसकी डिमांड कभी भी कम नहीं होती है.
फिलहाल बाजार में यह लगभग 30 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा है. जो एक महीने की फसल के हिसाब से काफी अच्छा रेट है. पूसा किरण जैसी उन्नत किस्मों का चुनाव करके आप बंपर पैदावार ले सकते हैं. अपनी आमदनी को बूस्ट देने और कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न पाने का यह सबसे स्मार्ट तरीका है.