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दुनियाभर में बैन है यह खरपतवारनाशक, जानें भारत में क्यों इस्तेमाल किया जा रहा यह जहर?

Paraquat Dichloride Herbicide: दुनियाभर के 74 देशों में बैन हो चुका पैराक्वाट डाइक्लोराइड खरपतवारनाशक भारत में धड़ल्ले से बिक रहा है. यह जानलेवा जहर छिड़काव के दौरान हर साल कई किसानों की जान ले रहा है

Paraquat Dichloride Herbicide: दुनियाभर के 74 देशों में बैन हो चुका पैराक्वाट डाइक्लोराइड खरपतवारनाशक भारत में धड़ल्ले से बिक रहा है. यह जानलेवा जहर छिड़काव के दौरान हर साल कई किसानों की जान ले रहा है

दुनियाभर में बैन हो चुके खतरनाक केमिकल्स आज हमारे खेतों में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं. खेतों में घास-फूस और अनचाहे पौधों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक ऐसा ही बदनाम खरपतवारनाशक है पैराक्वाट डाइक्लोराइड. यह केमिकल फसलों की आड़ में हमारे पर्यावरण, मिट्टी और किसानों की जिंदगी में धीमा जहर घोलने का काम कर रहा है.

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ग्लोबल लेवल पर देखा जाए तो दुनिया के करीब 74 देशों ने इसे सीरियली लिया है. उन देशों ने इसे इंसानी सेहत और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक मानकर पूरी तरह बैन कर दिया है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने बड़े विरोध के बावजूद भारत की मिट्टी में हर साल सैकड़ों मीट्रिक टन यह केमिकल उड़ेला जा रहा है.
ग्लोबल लेवल पर देखा जाए तो दुनिया के करीब 74 देशों ने इसे सीरियली लिया है. उन देशों ने इसे इंसानी सेहत और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक मानकर पूरी तरह बैन कर दिया है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने बड़े विरोध के बावजूद भारत की मिट्टी में हर साल सैकड़ों मीट्रिक टन यह केमिकल उड़ेला जा रहा है.
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भारत में इस जहर के खुलेआम बिकने की सबसे बड़ी वजह हमारे लचर नियम और पेस्टिसाइड कंपनियों का बड़ा मार्केट प्रेशर है. कंपनियां अपना मुनाफा कमाने के लिए इस घातक केमिकल को धड़ल्ले से बाजार में बेच रही हैं. सरकार की ढीली नीतियों और सख्त नेशनल बैन न होने का पूरा फायदा उठाकर ये कंपनियां देश के कोने-कोने में इसकी सप्लाई कर रही हैं.
भारत में इस जहर के खुलेआम बिकने की सबसे बड़ी वजह हमारे लचर नियम और पेस्टिसाइड कंपनियों का बड़ा मार्केट प्रेशर है. कंपनियां अपना मुनाफा कमाने के लिए इस घातक केमिकल को धड़ल्ले से बाजार में बेच रही हैं. सरकार की ढीली नीतियों और सख्त नेशनल बैन न होने का पूरा फायदा उठाकर ये कंपनियां देश के कोने-कोने में इसकी सप्लाई कर रही हैं.
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इस जानलेवा केमिकल का सबसे पहला और सीधा शिकार हमारे सीधे-साधे किसान भाई हो रहे हैं. खेतों में छिड़काव करते समय जरा सी लापरवाही या बिना सुरक्षा किट के इस्तेमाल से यह सीधे शरीर में पहुंच जाता है. इसके संपर्क में आने से देश के अलग-अलग राज्यों में लगातार किसानों की मौत और गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं.
इस जानलेवा केमिकल का सबसे पहला और सीधा शिकार हमारे सीधे-साधे किसान भाई हो रहे हैं. खेतों में छिड़काव करते समय जरा सी लापरवाही या बिना सुरक्षा किट के इस्तेमाल से यह सीधे शरीर में पहुंच जाता है. इसके संपर्क में आने से देश के अलग-अलग राज्यों में लगातार किसानों की मौत और गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं.
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हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार ने बढ़ते खतरों को देखते हुए पैराक्वाट पर 60 दिनों का अस्थाई प्रतिबंध लगाया है. राजस्थान और अन्य राज्यों से भी किसानों की मौत के बाद इसे पूरी तरह बैन करने की मांग तेज हो गई है. राज्य स्तर पर उठ रहे ये कदम साफ बताते हैं कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है.
हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार ने बढ़ते खतरों को देखते हुए पैराक्वाट पर 60 दिनों का अस्थाई प्रतिबंध लगाया है. राजस्थान और अन्य राज्यों से भी किसानों की मौत के बाद इसे पूरी तरह बैन करने की मांग तेज हो गई है. राज्य स्तर पर उठ रहे ये कदम साफ बताते हैं कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है.
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इस केमिकल के इस्तेमाल के पीछे किसानों की एक बड़ी मजबूरी यह भी है कि यह बहुत सस्ता और असरदार ऑप्शन लगता है. मजदूरों की बढ़ती किल्लत और महंगे होते दूसरे ऑप्शंस के कारण छोटे किसान अनजाने में इस जहर को खरीद लेते हैं. उन्हें इसके पीछे छिपे जानलेवा साइड इफेक्ट्स और अपनी सेहत के नुकसान का अंदाजा ही नहीं होता.
इस केमिकल के इस्तेमाल के पीछे किसानों की एक बड़ी मजबूरी यह भी है कि यह बहुत सस्ता और असरदार ऑप्शन लगता है. मजदूरों की बढ़ती किल्लत और महंगे होते दूसरे ऑप्शंस के कारण छोटे किसान अनजाने में इस जहर को खरीद लेते हैं. उन्हें इसके पीछे छिपे जानलेवा साइड इफेक्ट्स और अपनी सेहत के नुकसान का अंदाजा ही नहीं होता.
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अगर समय रहते केंद्र सरकार ने इस पर सख्त प्रतिबंध नहीं लगाया तो ग्रामीण इलाकों में सेहत का संकट और गहरा जाएगा. कंपनियों की तिजोरियां भरने के चक्कर में अन्नदाता अपनी जान गंवाता रहेगा. अब जरूरत है कि सरकार सख्त कदम उठाए और किसानों को इसके सुरक्षित और जैविक विकल्पों के प्रति जागरूक करे.
अगर समय रहते केंद्र सरकार ने इस पर सख्त प्रतिबंध नहीं लगाया तो ग्रामीण इलाकों में सेहत का संकट और गहरा जाएगा. कंपनियों की तिजोरियां भरने के चक्कर में अन्नदाता अपनी जान गंवाता रहेगा. अब जरूरत है कि सरकार सख्त कदम उठाए और किसानों को इसके सुरक्षित और जैविक विकल्पों के प्रति जागरूक करे.

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