प्राकृतिक खेती और जैविक खेती में क्या होता है अंतर? आसान भाषा में समझिए पूरा मसला
प्राकृतिक खेती प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने पर केंद्रित है. इसका लक्ष्य मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता को बढ़ाकर स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है. यह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करके किया जाता है.
प्राकृतिक खेती के कई लाभ हैं जिनमें मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, पानी की गुणवत्ता में सुधार, और फसल की पैदावार में वृद्धि शामिल है.
प्राकृतिक खेती में किसी भी प्रकार के रसायन या उर्वरक का प्रयोग नहीं किया जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार यह खेती पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर करती है. इस प्रकार की खेती में मिट्टी को भी नहीं जोता जाता है. प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसलों की पैदावार भी अच्छी होती है.
जैविक खेती एक ऐसी कृषि पद्धति है जो रसायनों के उपयोग को प्रतिबंधित करती है. इसका उद्देश्य पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना है. जैविक खेती में फसलों को प्राकृतिक तरीकों से उगाया जाता है, जैसे कि फसल चक्र, हरी खाद और जैविक कीटनाशकों का उपयोग.
जैविक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थ अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट होते हैं. जैविक खेती के लिए बुनियादी कृषि गतिविधियां जैसे जुताई, झुकना, खाद मिलाना, निराई आदि करनी होती हैं.