समय पर पैसा चुकाया तो नहीं देना होगा एक पैसे का ब्याज, इन राज्यों में किसानों की है चांदी

खेती करने वाले किसानों को हर साल बीज, खाद और दवाई खरीदने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार किसानों को फसल लोन देती है. लेकिन कई बार किसानों को इस लोन पर ब्याज भरना पड़ता है, जिससे उनकी जेब पर असर बोझ बढ़ जाता है. अब कुछ राज्य सरकारों ने किसानों के लिए एक खास सुविधा शुरू की है. इसके तहत अगर किसान समय पर अपना लोन चुका देता है, तो उसे एक पैसे का भी ब्याज नहीं देना पड़ता. आज हम आपको बताएंगे कि किन राज्यों में यह सुविधा मिल रही है और किसानों को इसका कैसे फायदा मिलेगा.
सबसे पहले बात करते हैं राजस्थान की. राजस्थान सरकार किसानों को सहकारी बैंकों के जरिए फसल लोन देती है. इस लोन पर केंद्र सरकार की तरफ से 3 प्रतिशत और राज्य सरकार की तरफ से 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है. इस तरह अगर किसान तय समय के भीतर अपना लोन चुका देता है, तो उसे लगभग कोई ब्याज नहीं देना पड़ता है. इससे लाखों किसानों को फायदा मिलेगा और वे डिफॉल्टर बनने से बच जाएंगे.
अगर किसान तय तारीख तक लोन नहीं चुकाते हैं, तो उन्हें कई नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं. उन्हें ब्याज सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा और साथ में 2 प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी भी देनी होगी. इसके अलावा अगली फसल के लिए नया लोन लेने में भी परेशानी आ सकती है. राजस्थान सहकारिता विभाग के मुताबिक, अगर समय सीमा नहीं बढ़ाई जाती तो करीब 2,184 करोड़ रुपये का लोन बकाया रह जाता. इसलिए सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए यह फैसला लिया, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के अपना लोन चुका सकें.
अब बात करते हैं मध्य प्रदेश की, जहां यह सुविधा सबसे पुरानी और बड़ी मानी जाती है. मध्य प्रदेश में साल 2012-13 से किसानों को जिला सहकारी बैंकों से जुड़ी समितियों के जरिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पावधि फसल लोन दिया जा रहा है. इस योजना के तहत किसान 3 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं और अगर वे समय पर इसे चुका देते हैं, तो उन्हें कोई ब्याज नहीं देना पड़ता. यह पैसा किसान खाद, बीज, कीटनाशक और खेती के औजारों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे किसानों को साहूकारों के पास जाकर महंगा ब्याज देने की जरूरत नहीं पड़ती.
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में इस योजना में एक और बड़ा बदलाव किया है. पहले किसानों को खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग तारीख तक लोन चुकाना पड़ता था, जिससे कई बार उन पर दबाव बढ़ जाता था. अब सरकार ने एक वार्षिक लोन सीमा तय कर दी है. इसका मतलब है कि किसान जिस तारीख को पहली बार पैसा निकालते हैं, उस तारीख से उन्हें पूरे 12 महीने का समय लोन चुकाने के लिए मिल जाएगा. इससे किसानों को फसल बेचने के बाद आराम से पैसा चुकाने का समय मिल जाएगा. इस नई व्यवस्था से राज्य सरकार पर करीब 880 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, लेकिन इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी.
इन दोनों राज्यों के अलावा भी देश में कई जगह किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी के जरिए सस्ता लोन दिया जाता है. केसीसी के तहत किसानों को खेती के खर्च के लिए बहुत कम ब्याज दर पर लोन मिलता है और समय पर पैसा चुकाने पर ब्याज में छूट भी दी जाती है. इससे साफ है कि सरकार किसानों को कर्ज के बोझ से बचाने और महंगे प्राइवेट लोन से दूर रखने के लिए लगातार नई-नई योजनाएं ला रही है. अगर किसान समय पर अपना कर्ज चुकाते रहें, तो उन्हें न सिर्फ ब्याज से छुटकारा मिलता है, बल्कि भविष्य में नया लोन लेना भी आसान हो जाता है.