गार्डनिंग का शौक रखने वाले सावधान, छत-बालकनी में सब्जियां उगाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

आजकल शहर के फ्लैट्स में रहने वाले लोग अपनी छत या बालकनी पर ताजी सब्जियां उगाने का शौक खूब रख रहे हैं. होम गार्डनिंग का यह ट्रेंड सेहत और सुकून दोनों के लिए बहुत शानदार है. लेकिन अक्सर लोग बिना पूरी जानकारी के इसकी शुरुआत कर देते हैं. शुरुआत में की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियां आगे चलकर पौधों की ग्रोथ को पूरी तरह से रोक देती हैं.
गार्डनिंग की शुरुआत करते समय सबसे पहली और बड़ी गलती लोग गमले या ग्रो बैग का साइज चुनने में करते हैं. अगर आप टमाटर, बैंगन या मिर्च जैसी बड़ी सब्जियां उगा रहे हैं. तो उनके लिए कम से कम 12 से 15 इंच का बड़ा गमला होना चाहिए. छोटे बर्तनों में पौधों की जड़ों को फैलने की जगह नहीं मिल पाती, जिससे उनकी ग्रोथ रुक जाती है.
सब्जियों के पौधों को लगाने के लिए सिर्फ साधारण मिट्टी का इस्तेमाल करना दूसरी सबसे बड़ी भूल साबित होती है. गमले के पौधों के लिए हमेशा एक बेहतरीन पॉटिंग मिक्स तैयार करना चाहिए. इसके लिए सामान्य मिट्टी के साथ कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट और थोड़ी सी नीम खली जरूर मिक्स करें, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए भरपूर न्यूट्रिएंट्स और हवा मिल सके.
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि पौधों में जितना ज्यादा पानी डालेंगे वे उतने ही तेजी से बड़े होंगे लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है. ओवरवाटरिंग यानी गमले में हर समय पानी भरा रहने से पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं और पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं. हमेशा मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही गमले में दोबारा पानी डालें.
सब्जियों के पौधों को अच्छी ग्रोथ और भरपूर फल देने के लिए धूप की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. कई लोग अपने गमलों को बालकनी के ऐसे कोने में रख देते हैं जहां बिल्कुल धूप नहीं आती. बिना पर्याप्त सनलाइट के पौधे सिर्फ लंबे और कमजोर होते हैं उनमें कभी भी अच्छे फूल और सब्जियां नहीं आ पातीं.
गमले की सीमित मिट्टी में न्यूट्रिएंट्स बहुत जल्दी खत्म हो जाते हैं. इसलिए पौधों को समय-समय पर सही खाद न देना भी एक बड़ी लापरवाही है. हर 15 से 20 दिनों में पौधों की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके आर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर या केंचुआ खाद जरूर डालें. सही समय पर मिलने वाला यह पोषण पौधों में बंपर सब्जियां लाता है.
आखिरी और सबसे जरूरी बात यह है कि पौधों को कीड़े-मकौड़ों और बीमारियों से बचाने के लिए रेगुलर चेक करते रहना चाहिए. अगर आप पत्तियों के पीछे छिपे कीटों पर ध्यान नहीं देंगे तो वे पूरी फसल को बर्बाद कर देंगे. इनसे बचाव के लिए हर हफ्ते नीम ऑयल का स्प्रे करें और सूखी पत्तियों की प्रूनिंग करते रहें.