Gamma Radiation: कोल्ड स्टोरेज में कर लें ये एक जुगाड़, कभी स्प्राउट नहीं होंगी आपकी सब्जियां

Gamma Radiation: फल और सब्जियों की आमतौर पर सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि कुछ समय बाद इनमें सड़न शुरू हो जाती हैं या फिर आलू और प्याज जैसी फसलों में स्प्राउटिंग होने लगता है. इस वजह से किसानों को कई बार अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है और नुकसान उठाना पड़ता है. लेकिन अभी इस समस्या से निपटने के लिए गामा रेडिएशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे फल, सब्जियां और दूसरे कृषि उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं.
गामा रेडिएशन एक प्रकार की विद्युत चुंबकीय विकिरण होती है, जो रेडियोधर्मी सोर्स से उत्पन्न होती है. खाद्य उत्पादों को नियंत्रित मात्रा में इन किरणों के संपर्क में लाया जाता है. इससे फल और सब्जियों में मौजूद फंगस, बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं जो सड़न पैदा करते हैं.
एक्सपर्ट्स के अनुसार गामा रेडिएशन का असर उन जीवाणु और फंगस के डीएनए पर पड़ता है, जो खाद्य पदार्थों को खराब करते हैं. इससे न केवल सड़न कम होती है, बल्कि अंकुरण की प्रक्रिया भी देनी पड़ जाती है, जिससे आलू और प्याज जैसी फसलों को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है.
गामा रेडिएशन प्रक्रिया के तहत पहले आलू-प्याज या दूसरे कृषि उत्पादों को प्लांट तक लाया जाता है, यहां इन्हें विशेष कंटेनरों में रखा जाता है और फिर निर्धारित मात्रा में गामा रेज दी जाती है.
इस प्रक्रिया के बाद आलू और प्याज में अंकुरण निकलने की संभावना बहुत कम हो जाती है. यही वजह है कि कई देशों में स्टोरेज के दौरान इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे उत्पादन की गुणवत्ता, स्वाद और पोषण पर कोई असर नहीं पड़ता है.
वहीं दुनिया के कई देशों में फल और सब्जियों के निर्यात के लिए रेडिएशन प्रोसेसिंग को जरूरी माना जाता है. अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों में ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता दी जाती है, जिन्हें रेडिएशन प्लांट से प्रोसेस किया जाता है.
आपको बता दें कि प्याज के मामले में भी गामा रेडिएशन को ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार स्टोरेज के दौरान प्याज में अंकुरण और सड़न सबसे बड़ी समस्या है, जिससे काफी मात्रा में उपज खराब होती है.
डॉक्टर के अनुसार फल और सब्जी की क्वालिटी पर इसका कोई नेगेटिव इफेक्ट नहीं पड़ता. यही वजह है कि दुनिया के तीन देशों में खाद्य संरक्षण के लिए इस तकनीक का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है.
गामा रेडिएशन को लेकर लोगों के यह भी सवाल उठाते हैं कि कैसे खाद्य पदार्थ रेडियोधर्मी हो जाते हैं. इसे लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा नहीं होता नियंत्रित और कम मात्रा में दिया गया रेडिएशन केवल सूक्ष्म जीवों पर असर डालता है.