खेती के लिए सब्सिडी पर कैसे मिलता है ड्रोन, पूरा प्रोसेस जान लें किसान

आजकल खेती में तकनीक का बोलबाला है और ड्रोन इस बदलाव का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरा है. उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को खेती में कीटनाशकों के छिड़काव और फसलों की निगरानी के लिए ड्रोन खरीदने पर भारी सब्सिडी दे रही है.
यूपी सरकार की ये स्कीम न केवल किसानों का समय बचाएगी. बल्कि खेती की लागत को भी काफी हद तक कम कर देगी. ड्रोन सब्सिडी का फायदा उठाने के लिए पात्रता के कुछ खास नियम बनाए गए हैं. इसी के आधार पर सब्सिडी दी जा रही है.
सरकार व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ कोऑपरेटिव सोसाइटी, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और कस्टम हायरिंग केंद्रों को भी इसमें प्राथमिकता दे रही है. अगर आप एक किसान हैं और अपनी खेती को डिजिटल बनाना चाहते हैं. तो आप इस योजना के लिए आसानी से आवेदन कर सकते हैं.
सब्सिडी की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि ड्रोन कौन खरीद रहा है. छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को ड्रोन की लागत का करीब 50 प्रतिशत या अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है. वहीं दूसरी कैटेगरी के किसानों के लिए सब्सिडी की दर 40 प्रतिशत या अधिकतम 4 लाख रुपये तय की गई है.
ड्रोन खरीदने के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रखी गई है. उत्तर प्रदेश के किसानों को कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण करना होगा. वहां आपको यंत्र पर अनुदान वाले सेक्शन में जाकर ड्रोन के लिए आवेदन फॉर्म भरना होगा और जरूरी दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करना होगा.
आवेदन के लिए आपको कुछ महत्वपूर्ण कागजात अपने पास तैयार रखने चाहिए. इसमें आपका आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, खतौनी (जमीन के कागज) और एक एक्टिव मोबाइल नंबर शामिल है. ध्यान रहे कि आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए. क्योंकि सब्सिडी की राशि सीधे आपके खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी.
ड्रोन चलाने के लिए सरकार ट्रेनिंग की सुविधा भी मुहैया करा रही है. चूंकि ड्रोन उड़ाना एक तकनीकी काम है, इसलिए सरकार प्रमाणित संस्थानों के जरिए किसानों को इसके संचालन और रख-रखाव की ट्रेनिंग देगी. बिना लाइसेंस या ट्रेनिंग के ड्रोन उड़ाना कानूनी रूप से सही नहीं है इसलिए सब्सिडी के साथ-साथ ट्रेनिंग लेना भी किसानों के लिए जरूरी है.